ऋषिकेश। हेवलघाटी प्रकृति को करीब से महसूस करने की चाह रखने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बन गई है। नदी किनारे संचालित बीच कैंप और जंगल कैंप पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिले इसके लिए स्थानीय ग्रामीण इस घाटी से सटे गांवों को पर्यटन ग्राम घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
यमकेश्वर ब्लॉक के अंतर्गत लक्ष्मणझूला से मात्र 10 किमी की दूरी पर हेवलघाटी है। यहां गरुड़चट्टी, रत्तापानी, घट्टूगाड़, मोहनचट्टी, बैरागढ़, नैल, बिजनी में हेवलनदी तट पर कैंप संचालित हैं। जो इन दिनों पर्यटकों से गुलजार हैं। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मुंबई, राजस्थान आदि प्रांतों के पर्यटक इस घाटी में घूमने आ रहे हैं। इस घाटी में कैंप के अलावा प्राकृतिक झरने पटना वाटर फॉल, कालीकुंड, गगनचुंबी पर्वतमालाएं, बंजिंग, जंपिंग आदि सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। हेवलघाटी में संचालित कैंपों में ठहरने के लिए पर्यटक एक महीने पहले एडवांस ऑनलाइन बुकिंग कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, कमलसिंह रावत, दिनेश सिंह, रविंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में प्रदेश सरकार ने गांवों में टूरिज्म डेवलपमेंट के लिए उत्तराखंड ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना तैयार की थी। जिसके तहत पर्यटन विकास की संभावना वाले एकल गांवों और गांवों के समूह को चयनित कर उन्हें विकसित किया जाना था। जिसमें ग्राम पंचायतों से उत्तराखंड ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना के तहत आवेदन मांगे जाने थे। उसी दौरान टूरिज्म विलेज योजना के तहत संभावनाओं वाले गावों के अंतर्गत टिहरी जिले के तपोवन, क्यार्की, नीर, शिवपुरी, गुलर और पौड़ी जिला अंतर्गत नीलकंठ, कोठार, भौन, पुंडरासू, रत्तापानी, घट्टूगाड आदि गांवो को पर्यटन गांव घोषित करने की मांग की थी। जिसमें से वर्ष 2016 में पौड़ी में चयनित गांव कण्वाश्रम, खिर्सू, उफिल्डा और कोठार चयनित हुए थे। टिहरी में मुखेम, सौड़, आराकोट और चोपड़ियाल थे। जबकि पौड़ी जिले रत्तापानी, घट्टूगाड, पटना, मोहनचट्टी, सिरासू, कोटा, धोतिया और बैरागढ़ भी शामिल हो सकते हैं। क्योंकि ये तीर्थनगरी के समीप वाले गांव हैं। जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इससे क्षेत्रीय रोजगार को भी प्राथमिकता मिल सकती है। कहा इसके लिए वे शासन-प्रशासन स्तर पर पत्राचार करेंगे।
पर्यटन ग्राम घोषित होने से रुकेगा पलायन
ऋषिकेश। हेवलघाटी से सटे गांव यदि पर्यटन ग्राम घोषित हो जाते हैं तो इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। गांव से हो रहा पलायन रुकेगा। खंडहर और वीरान पड़े पर्यटक स्थल जैसे पटना वाटर फॉल, कालीकुंड आदि स्थल जीवंत हो जाएंगे।
हेवलघाटी के लोगों का अभी तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है। यदि आता है तो शासन-प्रशासन स्तर पर इस ओर कवायद की जाएगी। विभागीय टीम क्षेत्र का निरीक्षण कर अग्रिम कार्रवाई करेगी।
-खुशाल सिंह, जिला पर्यटन अधिकारी पौड़ी