विभागीय लापरवाही का खामियाजा 50 बेसहारा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें घाट रोड स्थित पूर्व माध्यमिक नाभा हाउस विद्यालय भवन में रखा गया है। जबकि उनके लिए सर्वशिक्षा अभियान के तहत 22 लाख रुपये से छात्रवास बनना था। लेकिन, चार साल बाद भी छात्रवास का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। इसकी वजह बजट का खत्म होना बताया जा रहा है।
त्रिवेणीघाट नाभा हाउस में आवासीय हॉस्टल का निर्माण अधूरा होने से गरीब, अनाथ, बेसहारा बच्चों को परेशानियां उठानी पड़ रही है। छात्रवास निर्माण के लिए विभाग ने तीन अलग किस्तों में 21,96,400 रुपये दिए। निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे सर्वशिक्षा अभियान सहायक अभियंता नवीन जोशी ने बताया कि निर्माण कार्य वर्ष 2012-13 में शुरू हुआ। लेकिन, मार्च 2013 में कुछ स्थानीय लोगों ने निर्माणाधिन हॉस्टल के पास अपनी दुकानें खोलने को लेकर कार्य बंद करवा दिया। लंबे समय बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया। बताया कि परियोजना के अनुरूप छात्रवास के पठन-पाठन और ठहरने की व्यवस्था को देखते हुए भूतल के ऊपर निर्माण कार्य करने का फैसला लिया गया है। इसके बाद योजना का कार्य शुरू किया गया।
लेकिन, विभाग से बजट न मिलने और निर्माण कार्य की अवधि बढ़ने के साथ बढ़ती लागत के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया। विभाग से मिले 21,96,400 रुपये निर्माण कार्य में खर्च किए जा चुके हैं। बजट न होने से निर्माण कार्य की जिम्मेदारी थामे अधिकारी नेताओं और एनजीओ से मदद की गुहार लगा रहे हैं। फिलहाल 50 बेसहारा बच्चों को किसी की मदद से निर्माण कार्य पूरा होने तक इंतजार करना पड़ेगा।
एक क्लास में पढ़ रहे दो कक्षाओं के बच्चे
सर्वशिक्षा अभियान के तहत छात्रवास परियोजना पूर्ण न होने से 50 बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए प्राथमिक विद्यायल नंबर-1 में व्यवस्था की गई है। यहां कक्षा-एक और दो के नौनिहालों को एक साथ बैठाकर कक्षा चलानी पड़ रही है। विद्यालय में अन्य कमरे की व्यवस्था न होने से दोनों कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए मंत्रियों और एनजीओ से मदद की मांग की जा रही है। विभाग से भी उक्त निर्माण पूरा करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। - मेहरबान सिंह बिष्ट, जिला परियोजना अधिकारी, सर्वशिक्षा अभियान देहरादून