पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ परिवार सहित परमार्थ निकेतन स्थित गंगा आरती में शामिल हुए। उन्होंने गंगा आरती कर विश्वशांति, मानवता के कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि सभी के सुखमय जीवन के लिए प्रार्थना की। इस दौरान धनखड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति दुनिया की प्राचीनतम और आज भी जीवंत संस्कृतियों में से एक है। इसकी मूल भावना ज्ञान, आध्यात्मिकता, सेवा और मानव कल्याण की है। आज पूरी मानवता विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है।
ऐसे समय में भारतीय संस्कृति का ज्ञान और जीवन दर्शन दुनिया को सही दिशा दिखा सकता है। सोमवार को परमार्थ में गंगा आरती के दौरान परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की संस्कृति सबको स्वीकार करने की संस्कृति है। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना के साथ संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है। आज आवश्यकता है कि हम अपनी संस्कृति के इन जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि स्वामी चिंदानंद सरस्वती के सानिध्य व्यक्ति के भीतर गुरुतत्त्व की भावना को जागृत करता है। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में बिताए कुछ क्षणों ने ही उन्हें गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की। भारतीय संस्कृति हमें ज्ञान प्रदान करती है और यह ज्ञान सदैव हमारे चित्त में रहना चाहिए। हमारे वेद, पुराण और उपनिषद् ज्ञान के भंडार हैं। आज संपूर्ण मानव समाज किसी न किसी रूप में अनेक चुनौतियों और समस्याओं से जूझ रहा है। इन समस्याओं का समाधान भारतीय संस्कृति के जीवन-मूल्यों में निहित है। डाॅ. साध्वी भगवती सरस्वती ने जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।