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जोखिम भरी सड़क पर होगी नीलकंठ यात्रा

Thu, 31 Dec 2015 01:26 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
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अर्द्धकुंभ मेला 2016 में लाखों तीर्थयात्री जोखिम भरी राह पर प्राचीन नीलकंठ धाम की यात्रा करेंगे। कारण, बीते साल आपदा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए स्टेट हाईवे को लोक निर्माण विभाग एडीबी आपदा डिवीजन मंजूरी के साल भर बाद भी नहीं बना पाया है।
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कुंभ मेले के दौरान नीलकंठ शिवालय की सुगम यात्रा के लिए 11 किलोमीटर सड़क भी तैयार नहीं हो पाई है। लिहाजा में जनवरी में शुरू हो रहे अर्द्धकुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को जोखिम उठाकर नीलकंठ धाम की यात्रा करनी पड़ेगी।

अगस्त 2014 में यमकेश्वर में आई आपदा में स्टेट हाईवे नंबर नौ प्रखंड क्षेत्र में करीब 80 किमी तक कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। जलप्रलय के कारण हाईवे पर कई स्थानों पर डेंजर जोन बन गए और आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर सिंगल वाहनों का निकलना भी मुश्किल है।
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राज्य सरकार ने आपदा मद से नवंबर 2014 में बैराज-लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रतबाढाब-धूमाकोट स्टेट हाईवे के 80 किलोमीटर फूलचट्टी-दुगड्डा पैच की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग एडीबी आपदा डिवीजन पौड़ी को 36.36 करोड़ की वित्तीय मंजूरी दी थी। लेकिन महकमे ने समय पर कार्य शुरू नहीं कराया।

बीते जुलाई माह में बरसात के समय विभाग को हाईवे निर्माण की सुध आई। लेकिन तब लगातार तेज बारिश के कारण कार्य रोकना पड़ा। इसके बाद अक्तूबर में दोबारा सड़क पर कार्य शुरू किया गया। इसके तहत विभाग ने अर्द्धकुंभ मेले में नीलकंठ यात्रा के लिए स्टेट हाईवे के किलोमीटर 18 फूलचट्टी से किलोमीटर 29 पीपलकोटी तक 11 किमी पैच का डामरीकरण कुंभ शुरू होने से पहले पूरा कराने का दावा किया, लेकिन उक्त कार्य भी अभी तक नहीं हो पाया है।

वर्तमान में स्थिति यह है कि फूलचट्टी से पीपलकोटी के मध्य कई स्थानों पर सड़क पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हैं। ऐसे में मार्ग से गुजरने वाले लोगों को परेशान होना पड़ता है। यही स्थिति रही तो कुछ दिनों बाद अर्द्धकुंभ शुरू होने पर लाखों श्रद्धालुओं को भी हिचकोले खाकर जोखिम भरी यात्रा को मजबूर होना पड़ेगा।


मॉनिटरिंग के अभाव में रोकना पड़ा डामरीकरण
बीते अक्तूबर माह में पीडब्लूडी ने निर्माण एजेंसी से 11 किमी का डामरीकरण कार्य शुरू कराया। महकमे के अफसर एजेंसी के हवाले महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण छोड़कर चलते बने। लिहाजा गुणवत्ता में कमी आने लगी और आखिरकार मार्ग का कार्य रोकना पड़ा। इसका खामियाजा यमकेश्वर, द्वारीखाल और दुगड्डा प्रखंडों के सैकड़ों गांवों के लोग तो भुगत ही रहे हैं और अब कुछ दिनों बाद कुंभ यात्रियों को भी भुगतना होगा।

वास्तव में मार्ग की स्थिति अत्यधिक खराब है। मार्ग का निर्माण बांड प्रक्रिया के चलते विलंब से शुरू हुआ। निर्माण एजेंसी ने गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा, लिहाजा शीतकाल में डामरीकरण कार्य रोकना पड़ा। एक दो दिन में सड़क का मुआयना करेंगे और बड़े गड्ढों पर सीमेंट के पैच बनाए जाएंगे, ताकी राहगीरों को परेशानी न हो। - आलोक जैन, सहायक अभियंता, एडीबी आपदा पीडब्लूडी डिवीजन, पौड़ी।
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