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कोरोना काल का गर्भवती महिलाओं पर भी दिखा असर

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कोरोना से जहां पूरी दुनिया त्रस्त है। इसका असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ा है। कोरोना के कारण गर्भवती महिलाएं अपनी रुटीन जांच नहीं करवा पाईं। इसका असर यह हुआ कि ज्यादातर महिलाओं की ऑपरेशन से डिलीवरी करानी पड़ी।
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इस वर्ष अप्रैल से अगस्त महीने में सरकारी अस्पतालों में 40 फीसदी केस ऐसे हुए हैं, जिसमें सीजेरियन डिलीवरी हुई है। महिला चिकित्सकों ने इसका कारण गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर होने वाली जांच का नहीं होना बताया है। मार्च महीने से कोरोना के कारण लॉकडाउन था। कोरोना की दहशत से गर्भवती महिलाएं भी अपनी रुटीन जांच नहीं कर पा रही थीं। इसके कारण महिलाओं को डिलीवरी के दौरान परेशानी हुईे। बीते वर्ष की बात करें तो इसमें 20 फीसदी केस ही ऐसे हुए, जिसमें ऑपरेशन से महिलाओं का प्रसव हुआ। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष ऑपरेशन का ग्राफ 20 फीसदी बढ़ा है। एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं।
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वर्ष 2019-20 का आंकड़ा
माह कुल प्रसव सामान्य प्रसव ऑपरेशन प्रसव
अप्रैल 161 151 10
मई 178 145 33
जून 150 124 26
जुलाई 197 155 42
अगस्त 240 216 24
सितंबर 241 226 15
अक्टूबर 195 180 15
नवंबर 200 183 17
दिसंबर 211 198 13
जनवरी 245 233 12
फरवरी 180 164 16
मार्च 177 164 13
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वर्ष 2020-21 का आंकड़ा
माह कुल प्रसव सामान्य प्रसव ऑपरेशन प्रसव
अप्रैल 136 99 37
मई 165 117 48
जून 127 87 40
जुलाई 193 138 55
अगस्त 173 134 39
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मार्च से लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं सुचारु थीं, लेकिन कोरोना के डर के कारण गर्भवती महिलाओं ने समय-समय पर अपनी जांच और इलाज नहीं कराया। इस कारण प्रसव के दौरान ऑपरेशन की जरूरत पड़ी।
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- एनएस तोमर, सीएमएस, एसपीएस राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश
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