शीशमझाडी के एक आश्रम में पत्रकारो से वार्ता करते आश्रम ट्रस्टी।
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ऋषिकेश। शीशमझाड़ी स्थित पंचवटी कुटीर (ट्रस्ट) ने एक आश्रम पर धोखे से उनकी जमीन खरीदने और उस पर निर्माण करने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर शिकायत के बाद भी काम न रुकवाने का आरोप लगाया।
प्रेसवार्ता के दौरान पंचवटी कुटीर के ट्रस्टी अनिल काला ने कहा कि स्वामी लाला बाबाजी ने 1771 में धन्नालाल से शीशमझाड़ी में दस बीघा जमीन खरीदी थी। 1981 में आश्रम बनाना शुरु किया गया था। 1982 में उन्हें ट्रस्टी बनाया गया था। उन्होंने बताया कि स्वामीजी ने अपने कर्मचारियों और सेवकों को रहने के लिए कुछ जमीन दी थी। लेकिन कुछ सेवकों ने यह जमीन धोखे से दूसरे आश्रम को बेच दी है। आश्रम ने यह जमीन सेवकों को केवल रहने के लिए दी थी। इस जमीन के पूरे कागजात पंचवटी कुटीर ट्रस्ट के पास मौजूद हैं। 1991 में आश्रम प्रबंधन की ओर आश्रम का नक्शा हरिद्वार विकास प्राधिकरण से पास कराया गया है। सेवकों की ओर जो जमीन धोखे से दूसरे आश्रम को बेची गई है, उस आश्रम की ओर से उस पर निर्माण कराया जा रहा है, जबकि वह उनकी (पंचवटी कुटीर) जमीन है। दूसरे आश्रम ने उस जमीन पर किए जा रहे निर्माण को रुकवाने के लिए उन्होंने जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को भी शिकायत दर्ज कराई। जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) टिहरी की ओर से संबंधित आश्रम को पांच फरवरी को काम रोकने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया, लेकिन उसके बाद भी निर्माण कार्य नहीं रुका। वह स्थानीय पुलिस अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी पुलिस भी काम नहीं रुकवा पा रही है। प्रशासन भी संबंधित आश्रम के पक्ष में है। जिला विकास प्राधिकरण सीज करने के लिए कहा रहा है। लेकिन निर्माण सील नहीं करवा पा रहा है। प्रेसवार्ता में महंत सीताराम दास, महंत कौशलेंद्र दास, महंत रामबालक आदि उपस्थित थे।