इस बार चारधाम यात्रा के प्रति तीर्थयात्रियों में गजब का उत्साह है। 2013 की दैवी आपदा का खौफ गांव देहात से पहली बार यात्रा के लिए निकले श्रद्धालुओं के कदम नहीं डिगा पाया। ईश्वर की आस्था और भक्ति में में श्रद्धालु देव धामों के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।
बीते वर्ष भले ही यात्रा कुछ कम रही हो, लेकिन इस बार बाहरी प्रांतों के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। शनिवार को चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड में पहली बार चारधाम यात्रा के लिए आए अहमदाबाद, गुजरात के श्रद्धालुओं ने अपने दिल की बात अमर उजाला से साझा की..
इनका कहना है
दैवी आपदा से भारी से क्षति हुई थी, लेकिन चारधाम यात्रा प्राचीनकाल से चल रही है। यह किसी प्राकृतिक आपदा के खौफ से बंद नहीं हो सकती। ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास ही हमें यात्रा पर खींच लाया है।
-पुरुषोत्तम भाई पटेल
प्राणियों का जीवन ईश्वर के हाथों में है, इष्टदेव की चौखट पर मोक्ष की प्राप्ति से बड़ा सौभाग्य कुछ नहीं। हम पहली बार चारधाम यात्रा पर आए हैं। देवभूमि उत्तराखंड आकर सुकून मिल रहा है।
-संगीता बेन
चार धामों के दर्शन का मौका देने के लिए हम ईश्वर के आभारी है। चारधाम यात्रा के प्रति रोमांच है। यात्रा के बाद गांव जाकर सभी को यह संदेश दूंगी की यहां सब ठीक है। निसंकोच चारधाम के लिए आएं।
-गीता बेन
पहले दिन 2077 पंजीकरण
चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड टूटने के पूरे संकेत मिल रहे हैं। तीर्थयात्रियों का फोटोमीट्रिक पंजीकरण करने वाली त्रिलोक सिक्योरिटी के प्रबंधक प्रेम अनंत ने बताया कि शनिवार को यात्रा के पहले दिन 2077 तीर्थयात्रियों ने फोटोमीट्रिक पंजीकरण कराया है। जबकि पिछले साल पहले दिन केंद्र में केवल 104 श्रद्धालुओं ने ही पंजीकरण कराया था। कमोवेश यही हाल संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति का भी रहा है। पिछले वर्ष यात्रा के पहले दिन 17 बसों में 535 श्रद्धालु आस्था पथ पर रवाना हुए थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा दो गुना है। जबकि यात्रा की औपचारिक शुरुआत से दो दिन पहले भी चार वाहन धामों के लिए जा चुके हैं।