टीएचडीसी गेट के बाहर सांकेतिक धरना देते पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व अन्य।
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बृहस्पतिवार को चंद्रभागा नदी किनारे बेघर हुए लोगों से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजार रहे लोगों के कष्ट पर ढांढस का मरहम लगाने की कोशिश की। भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता करेंगे। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटवाना अपनी जगह वाजिब हो सकता है लेकिन लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था मुहैया कराना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इसके बाद गाड़ियों का काफिला तेजी से आगे बढ़ गया और बस्ती के लोग देखते ही रह गए।
पूर्व मुख्यमंत्री जब चंद्रभागा बस्ती पहुंचे तो राहत और संवेदना से ज्यादा राजनीतिक कार्यक्रम ज्यादा दिखा। कार्यकर्ताओं ने पहले से ही बस्ती के लोगों से ही फूल मालाओं से स्वागत की तैयारी करवा रखी थी। हालांकि हरीश रावत ने पीड़ितों से स्वागत की औपचारिकता करवाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ितों ने शासन प्रशासन की उपेक्षा बयान की। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दरअसल भाजपा सरकार का दिल गरीबों के लिए नहीं धड़कता है। भाजपा सरकार केवल अमीरों के लिए संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बस्ती के लोगों को नदी के किनारे कुछ भाग पर भूमि आवंटित करने की योजना बनी थी। भाजपा सरकार ने उस पर पानी फेर दिया।