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प्रभु के चरण व आचरण को आत्मसात करना सबसे बडी यात्रा

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परमार्थ गंगा घाट पर आरती में सम्मिलित होते मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत। - फोटो : RISHIKESH
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बारह ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा कर परमार्थ निकेतन पहुंचे श्री श्री 1008 स्वामी नर्मदानंद का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, स्वामी चिदानंद सरस्वती, मेयर अनिता ममगाईं और परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने स्वागत किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बारह ज्योर्तिलिंगों की यात्रा पैदल करके आना, प्रभु की छवि व उनकी पादुकाओं को अपने मन में रखना, प्रभु के चरण और उनके आचरण को आत्मसात करना ही सबसे बड़ी यात्रा है।
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इस मौके पर स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि हर तीर्थ और ज्योतिर्लिंग हरा भरा हो, दिव्य हो तथा दिव्यता से पूर्ण हो और इसकी खुशबू चारों ओर फैले। सभी मतों, संप्रदायों और मतभेदों से ऊपर उठकर हर दिल में स्वच्छता और देश भक्ति का दीप जलाएं। उन्होेंने कहा कि हमारी संस्कृति अर्पण, तर्पण और समर्पण की संस्कृति है। इस मौके पर सभी के मिलकर सभी पर्वों, उत्सवों और धार्मिक आयोजनों को हरित बनाने का संकल्प लिया। इस दौरान परमार्थ परिसर में रूद्राक्ष के पांच पौधों का रोपण किया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दीपावली की सौगात के रूप में परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों को कंबल वितरित किया।
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