बड़कोट वन रेंज के अंतर्गत वनों को आग से बचाने को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें निवर्तमान ग्राम प्रधानों, बीडीसी, महिला मंगल दल, राकइकॉ रानीपोखरी और जीआईसी के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
रेंजर धीरज सिंह रावत ने कहा कि बढ़ती आबादी और घटते जंगलों से जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं। 1947 में देश की आजादी के समय 33 करोड़ जनसंख्या थी। तब प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता पांच हजार घन मीटर थी। 1990 में 87 करोड़ आबादी पर जल उपलब्धता 1900 घन मीटर, 2024 में 142 करोड़ जनसंख्या पर घटकर 1160 घन मीटर रह गई है। जबकि 2030 में देश की आबादी 150 करोड़ होने पर जल उपलब्धता मात्र 1100 घन मीटर रह जाएगी।
कार्यक्रम में वन विभाग ने ग्रामीणों व महिलाओं से बातचीत कर वृक्षों के उनके जीवन में महत्व को लेकर एक सर्वे भी किया। जिसमें इमारती प्रकाष्ठ, ईंधन, चारा, जलधारण क्षमता, पारिस्थितिकीय सेवाएं को ध्यान में रखकर एक सारणी बनाई गई। जिसमें जड़ों में सर्वाधिक जलधारण क्षमता और दूसरे उपयोग के कारण बांज को प्रथम स्थान, तुन के पेड़ को द्वितीय और चीड़ को तृतीय स्थान दिया गया। चौथे नंबर पर भीमल का पेड़ और सारणी में सबसे कम नंबर खड़ीक के पेड़ को दिए गए।
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लघु फिल्म देखकर खुश हुए विद्यार्थी
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को वनाग्नि को लेकर डाक्यूमेंट्री और लघु फिल्म भी दिखाई गई। इस अवसर पर प्रधान संगठन अध्यक्ष सोबन सिंह कैंतुरा, निवर्तमान ग्राम प्रधान सुधीर रतूडी, बीडीसी विजय भट्ट, महेंद्र भट्ट, अनिल पाल, प्रधानाचार्य आरती, प्रकाश अंथवाल, महावीर चौहान, कपिल शर्मा, अखिलेश नौटियाल, अमित भट्ट, कंचन चौहान आदि मौजूद रहे।