राज्य कर्मचारी घोषित करने की मांग, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
- कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने सहित 13 सूत्री मांगों के समर्थन में तहसील परिसर में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। संगठन ने एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।
बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में तहसील परिसर पहुंची और सरकार के विरोध में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। संगठन की महामंत्री ललितेश विश्वकर्मा ने कहा कि देशभर में लगभग 11 लाख आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण, स्वच्छता, जच्चा-बच्चा देखभाल, पल्स पोलियो, टीबी मुक्त भारत सहित कई स्वास्थ्य अभियानों में उनकी अहम भागीदारी रहती है, लेकिन उन्हें अब तक राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। विश्वकर्मा ने कहा कि लंबे समय से आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी घोषित कर न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिए जाने, दुर्घटना की स्थिति में 5 लाख रुपये का बीमा, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि तथा कार्य के दौरान मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की जा रही है।
इसके अलावा अनुभवी आशा कार्यकर्ताओं को एएनएम पद पर पदोन्नति का अवसर देने, कार्य के दौरान किए गए यात्रा भत्ते का भुगतान या इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध कराने, पल्स पोलियो ड्यूटी का मानदेय 150 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये प्रतिदिन करने तथा विभिन्न योजनाओं के प्रोत्साहन मानदेय में बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।