एम्स में वर्ल्ड ट्रामा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते एम्स निदेशक रविकांत।
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ऋषिकेश। एम्स में शनिवार को वर्ल्ड ट्रॉमा डे मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। विश्व आघात दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविर में 50 यूनिट रक्तदान एकत्र किया गया। जिसमें संस्थान के फैकल्टी, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ व अन्य कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।
एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि ट्रॉमा के मरीजों को बचाने के लिए शुरुआती कुछ घंटे अति महत्वपूर्ण होते हैं, इसी के मद्देनजर एम्स में हैलीपैड का निर्माण किया गया है। उन्होंने बताया कि एम्स अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रॉमा केयर देने में पूरी तरह से सक्षम है। इस अवसर पर ट्रॉमा विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद कमर आजम ने बताया कि ट्रॉमा यानी ऐसी दर्दनाक घटना जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मकरूप से नुकसान पहुंचाती है, यह किसी भी कारण से हो सकती हैं।
ट्रॉमा सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य एवं आयोजन सचिव डॉ. भास्कर सरकार ने एक अध्ययन के हवाले से बताया कि भारत में हर वर्ष लगभग 1.35 लाख सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.50 लाख लोग अपनी जान गंवा लेते हैं। ऐसी दुर्घटनाओं में जो लोग जिंदा बच जाते हैं। उन पर अलग-अलग तरह की विकलांगता के इलाज का भारी-भरकम बोझ आ जाता है। जिससे न केवल विकलांगता और मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है, बल्कि इससे राष्ट्रीय उत्पादकता भी प्रभावित हो रही है। इस अवसर पर डॉ.जितेंद्र चतुर्वेदी न्यूरो सर्जरी, डॉ. सुशांत कुमार मीनिया ब्लड बैंक, डॉ. अल्ताफ मीर प्लास्टिक सर्जरी, हेमंत कुमार मेडिकल एजुकेशन विभाग, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर ट्रॉमा ओटी सिनोज पीजे, शिखा भट्ट ट्रामा वार्ड इंचार्ज, ट्रॉमा वार्ड नर्सिंग इंचार्ज हेमा जोशी,ट्रॉमा सर्जरी विभाग की डॉ.रूबी कटारिया, डॉ.विशाल पाटिल आदि को प्रशस्तिपत्र व स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत जी ने ट्रॉमा वेबसाइट व ट्रॉमा सेंटर के निजी पत्रिका ट्रॉमा एपीसिल का उद्घाटन भी किया।