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एम्स विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाए सरकार

Sat, 06 Feb 2016 03:16 AM IST
ऋषिकेश, अमर उजाला ब्यूरो
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एम्स प्रशासन ने राज्य सरकार पर संस्थान के सुचारु संचालन में कानून व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया है। संस्थान का कहना है कि एम्स में आउटसोर्सिंग पर रखे गए ठेका कर्मियों को संबंधित ठेकेदार का कांट्रैक्ट समाप्त होने के बाद हटा दिया गया था। वे अब एम्स के खिलाफ गैर कानूनी तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले उक्त कर्मी कार्यालय में तोड़फोड़ भी कर चुके हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई और कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं कर रही है।
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एम्स प्रशासन ने संस्थान परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित कर दिया है। एम्स के प्रवक्ता का कहना है कि संस्थान विरोध गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगा तो सोमवार से एम्स को बंद करना पड़ सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के प्रवक्ता हरीश थपलियाल ने बताया कि एम्स ऋषिकेश के खिलाफ बीते कुछ दिनों से पूर्व ठेका सफाई कर्मचारी गैर कानूनी तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

हटाए गए 17 कर्मचारी पहले भी एम्स प्रशासन के अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और कार्यालय में तोड़फोड़ कर चुके हैं। इन लोगों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है। संस्थान का कहना है कि कुछ लोग एम्स में अराजक माहौल बनाना चाहते हैं। कुछ स्थानीय नेताओं के इशारे पर यह सब किया जा रहा है। ऐसे लोगों के संस्थान में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। एम्स के प्रवक्ता थपलियाल ने बताया कि संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार इन गतिविधियों से बीते बुधवार को राज्यपाल और मुख्यमंत्री को अवगत कराकर शासन से सहयोग मांग चुके हैं।
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जारी हैं आईपीडी और ओपीडी सेवाएं
एम्स प्रशासन का कहना है कि संस्थान में इन पेसेंट डिपार्टमेंट आईपीडी और आउट पेसेंट डिपार्टमेंट ओपीडी की सेवाएं सुचारु हैं। बताया गया कि कुछ लोग एम्स संस्थान के खिलाफ किए जा रहे गैर कानूनी धरना-प्रदर्शन के चलते संस्थान की सेवाएं बाधित होने की अफवाह फैला रहे हैं। जबकि, संस्थान में बीते दो फरवरी से शुक्रवार तक लगातार आईपीडी और ओपीडी में रोगियों का पंजीकरण, जांच आदि कार्य सुचारु रूप से जारी है। एम्स संस्थान ने इसके बाकायदा आंकड़े भी जारी किए हैं।
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