न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक राम त्रिपाठी की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में किए गए दायर वाद को झूठा मानते हुए आरोपी को दोषमुक्त किया है। वादी की ओर से दी गई तथाकथित रकम को आयकर रिटर्न में छुपाने का भी मामला सामने आया है।
अधिवक्ता शुभम राठी ने बताया कि दिनेश कोठारी पुत्र स्व. गुणानंद कोठारी निवासी देहरादून रोड ऋषिकेश ने न्यायालय में एक वाद दायर किया। इसमें उन्होंने गिरीश मल्होत्रा पुत्र स्व. धर्मपाल निवासी बंगाली मंदिर मार्ग ऋषिकेश को आरोपी बताकर कहा कि उक्त व्यक्ति ने 17 अक्टूबर 2015 को चार लाख रुपये लेकर वापस नहीं लौटाए। जब उन्होंने उधार की रकम मांगी तो चार लाख का एक चेक 19 जनवरी 2016 को दिया। यह चेक 21 जनवरी 2016 को बाउंस हो गया। अधिवक्ता ने बताया दिनेश कोठारी ने न्यायालय के समक्ष झूठी कहानी बताई, जबकि गिरीश मल्होत्रा की ओर से किसी भी प्रकार का कोई उधार उक्त तिथि को नहीं लिया गया। अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि वर्ष 2013 में 20 हजार रुपये आरोपी ने वादी से लिए थे। इसकी एवज में वादी दिनेश कोठारी ने कुछ ब्लैंक चेक आरोपी से ले लिए थे। उधार की रकम लौटाते वक्त वादी ने आरोपी को उसके चेक वापस नहीं किए।
अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष एक अन्य दायर वाद की प्रमाणित प्रति पेश की। बताया कि वादी ने उक्त तिथि से ठीक चार माह पूर्व आरोपी की पत्नी के नाम चेक बाउंस का एक अन्य वाद छह लाख रुपये का दायर किया था। कोर्ट ने कहा कि यदि वादी दिनेश कोठारी ने 17 अक्टूबर 2015 को आरोपी गिरीश मल्होत्रा को चार लाख रुपये उधार दिए तो उसे आयकर रिटर्न में भी पेश नहीं किया। अधिवक्ता शुभम राठी की मजबूत पैरवी के आधार पर न्यायाधीश आलोक राम त्रिपाठी ने माना कि वादी का संपूर्ण कथानक संदेहपूर्ण है। वादी अपने आरोपों के प्रमाण में कोई पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत कर पाने में अक्षम साबित हुआ। कोर्ट ने माना कि जब पूर्व में आरोपी की पत्नी पर चेक बाउंस का वाद दायर किया जा चुका था तो ऐसे में दोबारा चार लाख रुपये उधार देने की बात सत्य से परे प्रतीत होती है। इसके अलावा वादी ने उक्त चार लाख की रकम को आयकर रिटर्न में भी नहीं दर्शाया है। न्यायाधीश ने आरोपी गिरीश मल्होत्रा को साक्ष्य के अभाव में गुणदोष के आधार पर दोषमुक्त कर दिया है।