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अस्तित्व के संकट से जूझ रही हेंवल नदी बनेगी सदानीरा

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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आने वाले दिनों में हेंवल नदी अपने वास्तविक रूप में प्रवाह के साथ दिखेगी। वन विभाग सहयोगी संस्थाओं के साथ इसकी रूपरेखा तैयार करने में जुटा है। कार्ययोजना का खाका अप्रैल के अंत तक तैयार हो जाएगा। इसके बाद फंड जुटाने की तैयारियां शुरू होंगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत न सिर्फ नदी का जलस्तर बढ़ाने का प्रयास होगा बल्कि आसपास के निर्भर किसानों के लिए भी जीवनोपार्जन के स्रोत खुलेंगे।
वर्तमान में हेंवल नदी अस्तित्व के लिए जूझ रही है। इसका जलस्तर बहुत ही कम रह गया है। वर्षाकाल के दौरान नदी अपने उफान पर रहती है, लेकिन ये जलप्रवाह निरंतर नहीं रह पाता है। हेंवल का जलस्तर वर्ष भर एक-सा बना रहे और इसका उपयोग नदी के दोनों छोर पर बसे किसानों का भी कायाकल्प हो सके इसकी रणनीति तैयार हो रही है। इसके लिए वन विभाग अपनी सहयोगी संस्थाओं हिमोत्थान, एसआर एशिया, जायका, कैम्पा, मौसम विभाग, जल संस्थान, स्थानीय वन पंचायत के साथ मिलकर शोध कर रहा है। यह शोध अप्रैल माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।
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दो चरणों में होगा योजना का क्रियान्वयन
प्रभागीय वनाधिकारी धर्म सिंह मीणा ने बताया कि इसके लिए दो चरणों में कार्य योजना बन रही है। प्रथम चरण में सुरकुंडा मंदिर से बेमुंडा तक तथा दूसरा चरण बेमुंडा से शिवपुरी तक होगा। सुरकुंडा से बेमुंडा तक करीब 40 किलोमीटर का क्षेत्र हेंवल नदी का पड़ता है। इस नदी पर करीब 50 गांवों की जनता निर्भर है। इसका जल काफी ठंडा होने के कारण कृषि योग्य नहीं है। मंथन किया जा रहा है कि नदी के जल को कृषि योग्य कैसे बनाया जाए। इसके अलावा जलस्तर बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके लिए सहयोगी संस्था जलागम की सहायता से वनस्पति, जमीन और मिट्टी के मैप तैयार किए गए हैं। मौसम विभाग से पिछले 30 सालों में वर्षा का रिकॉर्ड लिया गया है। हीमोत्थान संस्था हेंवल नदी के पुनरुद्धार योजना का तकनीकी पक्ष संभाल रही है। एसआर एशिया, जायका, कैम्पा संस्थाएं योजना के लिए फंड उपलब्ध कराएंगी।
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जल स्तर बढ़ाने के लिए जमीन के अंदर स्रोत खंगाले जाएंगे
डीएफओ के अनुसार हेंवल नदी का जलस्तर बढ़ाए जाने के लिए जमीन के अंदर पानी के स्रोतों को खंगाला जाएगा। नदी के जल का वेग ज्यादा न हो, इसके लिए छोटे-छोटे कुंए बनाने की योजना है। नदी के दोनों ओर बसे गांवों के लोगों से वार्ता कर माइक्रो प्लान तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों से भी सुझाव मांगे गए हैं। सिंचाई के लिए लोगों ने गूल, तालाब आदि का विकल्प सुझाया है। हेंवल के जल को कृषि योग्य बनाने के लिए नदी में रिचार्ज पिट (नदी में 20 से 30 मीटर गड्ढे बना कर उन्हें भूमिगत जोड़ा जाना) बनाए जाएंगे। इससे अत्यधिक ठंडे जल को सामान्य करने में न मदद मिलेगी। इसके अलावा सिविल क्षेत्रों में प्लांटेशन किया जाएगा। नदी का जो क्षेत्र चौड़ा है, वहां पर बड़े चैक डैम बनाए जाएंगे।
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