ब्यूरो /अमर उजाला, ऋषिकेश। बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान में मनरेगा कितना समाधान, कितना धोखा विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें बजरंग मुनि ने कहा कि स्वतंत्रता के लगभग छह दशक के बाद भारत में पहली बार इस एकाधिकार पर अंकुश लगाने का इमानदारी से प्रयास करते हुए नरेगा योजना के माध्यम से शारीरिक श्रम को बौद्धिक श्रम से अलग किया गया था। इसमें जाति, धर्म, लिंग आदि का भेद नहीं था, बल्कि प्रत्येक परिवार से किसी एक सदस्य को वर्ष में न्यूनतम 100 दिन की रोजगार की गारंटी देने की व्यवस्था की गई थी। इस योजना को भी बाद में बुद्धिजीवी, पूंजीपतियों और राजनेताओं ने एक षड्यंत्र के तहत असफल कर इतिहास का विषय बना दिया है।
योगाचार्य अंकित नैथानी ने कहा कि यह योजना हजारों वर्षों के बाद बनी, लेकिन फिर से अमीर बुद्धिजीवियों और शहरी लोगों ने पूरी योजना को असफल कर दिया। इस अवसर पर प्रमोद कुमार वात्सल्य, विनोद जुगलान, उषा रावत, अनुसूया प्रसाद बिजल्वाण, एडवोकेट रामवल्लभ भट्ट, राजीव थपलियाल, प्रेमदत्त डिमरी, शुभेंदु महापात्रा, अग्निमित्र प्रसाद, राहुल चौरसिया, अभिषेक शर्मा, उषा रावत, पुष्पा ध्यानी, योगाचार्य विजय पैन्यूली, वीरेंद्र ममगाईं, सौरभ पैन्यूली, अंकित रतूड़ी, मंगल प्रसाद, अरविंद तिवारी, मुकेश ग्रोवर, चिंतामणि देशवाल, विजय कुमार जालंधर, हनी कुमार आदि उपस्थित रहे।