शराबियों का अड्डा बना आस्थापथ
ब्यूरो/अमर उजाला
ऋषिकेश। गंगा किनारे बना आस्थापथ शराबियों के लिए महफूज जगह बन गई है। यहां शराब पीने वालों की तादाद अंधेरा होने के साथ बढ़ने लगती है। यहां गंगा किनारे बैठ कर खुलेआम शराब पीने वालों को पुलिस का खौफ नहीं है। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं तो आहत हो ही रही है। साथ ही देश-विदेश में तीर्थनगरी की छवि भी खराब हो रही है। बुधवार की सुबह सैर के लिए निकले लोगों ने एक बैंच पर बीयर और अंग्रेजी शराब की बोतल और गिलास पड़े देखे। जिस लोगों ने रोष जताते हुए इसे पुलिस की लापरवाही बताया।
आस्थापथ पर रोजाना सैकड़ों देश-विदेश के पर्यटक व स्थानीय लोग घूमने के लिए आते हैं। यहां खुलेआम जमा छलकाए जा रहे हैं। यह अश्लील हरकतें हो रही हैं। इतना ही नहीं असामाजिक तत्व आस्थापथ पर लगी रेलिंग, गमले, बेंच व स्ट्रीट लाइटों को भी क्षतिग्रस्त कर सौंदर्यीकरण की धज्जियां उड़ा रहे हैं। शाम को अंधेरा होते ही आस्थापथ पर महफिलें सजनी शुरू हो जाती हैं। ऐसी शर्मनाक हरकतों में ज्यादातर युवा वर्ग के लोग शामिल होते हैं।
2017 में गश्त के लिए आईं साइकिलें गायब
ऋषिकेश। गंगा तट पर बने आस्थापथ पर दिनों दिन बढ़ती अराजकता और असामाजिक गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए कोतवाली पुलिस ने सितंबर 2017 में साइकिल से गश्त की पहल की थी। इसके लिए तत्कालीन कोतवाल प्रवीण कोश्यारी ने आस्था पथ पर एक महिला और पुरुष पुलिस कर्मी को साइकिल सहित हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। मकसद यह था कि आस्थापथ पर बाइक या अन्य वाहनों से गश्त नहीं किया जा सकता। लिहाजा सुबह शाम नियमित रूप से साइकिल पेट्रोलिंग की जाए। इसके लिए पुलिस की दो टीमों को जिम्मा सौंपा गया था। फिलहाल मौजूदा घटनाएं गश्त के हालात बयां कर रही हैं और साइकिलों का भी पता नहीं है।
केवल लिखा दिया, सीसीटीवी कैमरे लगाए ही नहीं
ऋषिकेश। आस्थापथ पर हुई वालपेंटिंग पर यकीन कर लेंगे तो आपको सारी व्यवस्था लकदक लगेगी। हकीकत की तह में जाएंगे तो व्यवस्था का मजाकिया स्वरूप के सिवा कुछ नहीं दिखेगा। दरअसल, आस्थापथ की दीवार पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है कि आप सीसीटीवी कैमरे की नजर में है। असलियत में यहां कभी सीसीटीवी कैमरे लगे ही नहीं। यदि ऐसा हुआ होता तो शराबियों के अड्डे यहां न बन पाते।
जगह-जगह अवैध शराब की दुकानें, ड्राई जोन बना मजाक
ऋषिकेश। पुलिस आए दिन शराब तस्करों को पकड़ रही है। इसके बावजूद तस्कर रक्तबीज की तरह पैदा हो रहे हैं। तीर्थनगरी क्षेत्र में रेलवे रोड पर पुरानी जाटव बस्ती के बाहर खड़े युवा और अधेड़ वर्ग के लोग सुबह से ही सड़क के दोनों ओर खड़े होकर आने-जाने वाले ग्राहकों को इशारों में बुलाकर शराब उपलब्ध होने की जानकारी देते हैं। कोई जरूरतमंद मिल गया तो उसे एसबीआई बैंक वाली गली में भेजकर एजेंट चलते बनता है। उसके बाद यहां ग्राहक को उसकी पसंद की शराब की बोतल थमा दी जाती है। ये सिलसिला रोजाना का है। इसके अलावा बनखंडी रॉयल बेकरी के पास, शांतिनगर परशुराम चौक के समीप, चंद्रेश्वर नगर, मायाकुंड, नई जाटव बस्ती, इंद्रा नगर आदि क्षेत्रों में अवैध शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं।
ये हैं ड्राई जोन के अघोषित मयखाने
ऋषिकेश। तीर्थनगरी भले की ड्राई जोन घोषित हो लेकिन यहां अघोषित मयखानों की कमी नहीं है। शराबी अक्सर खुले मैदानों में महफिल सजाते हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन और मीट मार्केट के बीच का मैदान, सोमेश्वर मंदिर का मैदान, गुल्हाटी प्लांट, रोडवेज बस अड्डा, चंद्रभागा पुल के नीचे, मायाकुंड, पुराना रोडवेज बस अड्डा, परशुराम चौक के पास बने कांपलेक्स तथा खाली प्लाट में अंधेरा होते ही लोग जाम छलकाने लगते हैं।
साइकिल पर गश्त जैसी व्यवस्था की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। पुलिस टीम नियमित तौर पर आस्थापथ पर गश्त करती है। आस्था पथ पर सीसीटीवी लगे होने की जानकारी मुझे नहीं है। कोतवाल छुट्टी पर हैं। वापस आने पर वे ही ज्यादा बेहतर बता पाएंगे।
- पवन कुमार, प्रभारी, कोतवाली ऋषिकेश
आस्थापथ पर सीसीटीवी फुटेज नहीं है। अराजक तत्वों में पुलिस का भय बनाने के लिए संबंधित स्लोगन लिखे गए हैं। आस्था पर साइकिल से गश्त भी की जाती है। एक साइकिल जल पुलिस के जवानों के पास है और एक साइकिल घाट चौकी के पास है।
- अरुण त्यागी, प्रभारी, त्रिवेणी घाट पुलिस चौकी