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तीन बिंदुओं पर संशोधन के बाद लागू हो कानून

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में आईएमए, डेटल एसोसिएशन और आयुर्वेद चिकित्सकों ने संयुक्त तौर पर विरोध की मुहिम छेड़ी है। आईएमए, ऋषिकेश के अध्यक्ष डॉ. हरिओम प्रसाद ने नगर निगम सभागार में एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि सरकार जिस तरह से एक्ट को लागू करना चाहती है उसे अपनाना नामुमकिन है। सरकार कुछ कारपोरेट घरानों के दबाव में निजी चिकित्सकों के क्लीनिक बंद करवाने पर आमादा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि एक्ट को लेकर उनका कोई विरोध नहीं है, लेकिन तीन बिंदुओं पर संशोधन के बाद ही कानून को लागू किया जाना चाहिए।
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इसके तहत नर्सिंग होम के लिए 5 हजार वर्ग फुट जमीन, पुराने तकनीकी कर्मियों का पंजीकरण और डिस्ट्रिक्ट रेगुलटरी अथॉरिटी में पुलिस अफसरों की मौजूदगी को खत्म किया जाए। निजी चिकित्सकों का मानना है कि इससे इंस्पेक्टर राज कायम हो जाएगा। इस दौरान डॉ. हरीश द्विवेदी, डॉ. ऋचा उपाध्याय, डॉ. नरेंद्र रतूड़ी, डॉ. रितु प्रसाद, सहित नगर भर के मेडिकल स्टोर संचालक भी शामिल रहे।
निजी चिकित्सकों ने विरोध में निकाली रैली
ऋषिकेश। क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में बुधवार को निजी चिकित्सकों ने एक रैली भी निकाली। इससे पहले शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखकर आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके बाद नगर निगम से शुरू हुई रैली त्रिवेणी घाट, देहरादून रोड होते हुए राजकीय अस्पताल में खत्म की गई। निजी चिकित्सकों की मांग है कि हरियाणा की तर्ज पर उत्तराखंड में भी सीईए लागू किया जाए। सरकार ऐसा न करके निजी अस्पतालों को बंद करवाना चाहती है तो हम पहले ही तालाबंदी कर अपना विरोध दर्ज करवाते रहेंगे। इसके चलते जो भी बेरोजगारी आएगी उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
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