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आयोग ने चिल्ड्रन होम अकादमी के दस्तावेज किए तलब

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। चिल्ड्रन होम अकादमी में सातवीं कक्षा के छात्र वासु की हत्या के मामले में सोमवार को अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने अध्यक्ष आरके जैन के नेतृत्व में अकादमी का दौरा किया। इस दौरान स्कूल प्रबंधन सहित पुलिस अफसरों के साथ अलग-अलग बैठक की। इस दौरान स्कूल की मान्यता और सोसायटी से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए। अध्यक्ष आरके जैन ने बताया कि दस्तावेजों के मुताबिक सीबीएसई से स्कूल की मान्यता 2020 तक है। इसके अलावा भी दस्तावेज मंगवाए गए लेकिन संख्या ज्यादा होने के कारण मौके पर सभी कागजात नहीं देखा जा सका। लिहाजा दस्तावेजों को आयोग के कार्यालय में तलब किया गया है।
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आयोग ने स्कूल प्रबंधन को हिदायत दी कि अकादमी की व्यवस्थाएं सुधारें, ताकि भविष्य में किसी तरह की लापरवाही न होने पाए। सुबह करीब 10:30 पर आयोग अध्यक्ष आरके जैन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल चिल्ड्रन होम अकादमी पहुंचा। दल में आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. सतीश जैन और सचिव जेएस रावत भी शामिल रहे। उन्होंने हिदायत दी कि जल्द ही सोसायटी की आपात बोर्ड बैठक की जाए। वासु की हत्या के मामले में जितने भी आरोपी सामने आए हैं उन पर पुलिस और कोर्ट अपना काम कर रही है। इसके अलावा स्कूल अपने भी स्तर से मामले की पड़ताल कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके बाद आयोग सदस्यों ने ब्वायज हॉस्टल का भी दौरा किया और बच्चों से संवाद किया।

पीड़ित परिवार की मदद को शासन में करेंगे सिफारिश
वासु हत्या मामले में परिवार की मदद के लिए अल्पसंख्यक आयोग शासन में सिफारिश करेगा। आयोग अध्यक्ष आरके जैन ने कहा कि उनके पास कोई इस तरह का फंड नहीं होता है लेकिन शासन में मदद की पैरवी की जाएगी। साथ ही स्कूल प्रबंधन से भी संभव मदद के लिए कहा जाएगा। कोशिश की जाएगी कि वासु के पिता झप्पू यादव अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई और देखभाल करने में सक्षम हो सके।
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आज अकादमी पहुंचेंगे वासु के पिता
बेटे वासु की मौत के बाद झप्पू यादव मंगलवार को दूसरी बार चिल्ड्रन होम अकादमी पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि बेटियों का सर्टिफिकेट लेने अकादमी जाना है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद अब वह दोनों बेटियों को चिल्ड्रन होम में नहीं पढ़ाएंगे। वह सुबह अकादमी से सर्टिफिकेट लेने के बाद बाल संरक्षण आयोग दफ्तर भी जाएंगे। वहां आयोग अध्यक्ष ऊषा नेगी से भी मुलाकात करेंगे।


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वासु के अंतिम संस्कार में भी साजिशों का जाल
- बिना भरोसे में लिए परिजनों से एफिडेविट पर करवा लिए हस्ताक्षर

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। वासु के अंतिम संस्कार को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। झप्पू यादव से 11 मार्च को एक एफिडेविट पर आननफानन में हस्ताक्षर करवाने के बाद वासु के शव को चिल्ड्रन होम अकादमी में दफन कर दिया गया। इस संदर्भ में झप्पू यादव से वार्ता हुई तो उन्होंने बताया कि वह अनपढ़ हैं। बेटियों ने सिर्फ हस्ताक्षर करना सिखा दिया है। उन्हें लिखना पढ़ना नहीं आता। झप्पू यादव के मुताबिक बीते 10 मार्च को वे देहरादून एक शादी में शामिल होने आए थे। इस दौरान उन्हें बेटे के साथ हुई घटना का पता चला तो वे सन्न रह गए।
पोस्टमार्टम के बाद उनके सामने पुलिस और स्कूल प्रबंधन के लोग एक एफिडेविट लेकर आए और हस्ताक्षर करने को कहा। किसी ने यह भी नहीं पूछा कि अंतिम संस्कार किस धार्मिक रीति रिवाज से किया जाए। उनसे बस इतना ही पूछा गया कि क्या अंतिम संस्कार कर दें। पीड़ित परिवार इस घटना की शिकायत भी को बाल संरक्षण आयोग में करेगा।

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मोहन महतो गुमशुदगी मामले की फिर से होगी जांच
- वर्ष 2017 में 22 सदस्यीय दल ट्रैकिंग के लिए गया था, छात्र अचानक हुआ था गायब
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। चिल्ड्रन होम अकादमी के छात्र मोहन महतो गुमशुदगी मामले की फिर जांच होगी। सोमवार को अकादमी पहुंचे अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष आरके जैन ने कहा कि मोहन महतो गुमशुदगी मामले की फाइल तलब की जाएगी। शासन में रखा जाएगा कि मामले की जांच फिर से शुरू की जाए। बता दें कि वर्ष 2017 में अकादमी का 22 सदस्यीय दल ट्रैकिंग के लिए टिहरी के भोगपुर इठराना गया था। इसी दौरान 18 वर्षीय छात्र मोहन महतो अचानक गायब हो गया था। तत्कालीन थानाध्यक्ष नरेंद्र नगर, थाना रोनीपोखरी और एसडीआरएफ की संयुक्त रेस्क्यू टीम ने पूरे क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया। इसके बावजूद छात्र के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।
उन्होंने बताया कि पता चला है कि मोहन महतो मामले में नरेंद्र नगर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट सौंपकर मामले को बंद कर दिया है। जल्द ही इस मामले से जुड़ी फाइल को तलब कर अफसरों से जानकारी ली जाएगी कि किन परिस्थितियों में मामले की फाइल को बंद किया गया। नरेंद्र नगर थाना प्रभारी मनीष उपाध्याय ने कहा कि छह महीने या साल भर विवेचना के बाद कुछ पता नहीं चलता है तो केस बंद कर दिया जाता है। फिलहाल मोहन महतो का मामला काफी पुराना और मेरी ज्वाइनिंग से पहले का है।

केस बंद करने के लिए क्या औपचारिकताएं
कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो गुमशुदगी की विवेचना से जुड़ी फाइल तभी बंद की जाती है जब कोई सुराग मिलने की संभावना खत्म हो जाती है। इससे पहले नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो, डिविजनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो, समाचार पत्रों में विज्ञापन दर्ज कराया जाता है। इसके अलावा सबसे अहम ये है कि शिकायतकर्ता की ओर से फाइल बंद करने की लिखित रजामंदी भी ली जाती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि मोहन महतो गुमशुदगी कांड में उसके परिजनों से भी सहमति ली गई या फिर स्कूल की ओर से शिकायतकर्ताओं ने ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर केस को रफा दफा करवा दिया।
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