मौसम विभाग का पूर्वानुमान था कि इस साल सामान्य से अधिक बारिश होगी। जुलाई माह आधा बीत चुका है, पर अब तक इंद्र देवता मेहरबान नहीं हुए। बारिश नहीं होने से वन विभाग का वानिकी कार्य प्रभावित हुआ है। जंगल में रोपने को मंगाए 21 हजार पौधे रेंज कार्यालय में रखे है।
प्रत्येक वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह में वन विभाग पर्यावरण संरक्षण के लिए जंगल और आसपास के क्षेत्रों पौध रोपण करता है। बीते वर्ष 2015 को जुलाई के प्रथम सप्ताह से जमकर बारिश हुई, लेकिन इस बार बारिश बहुत कम होने से जंगल में सूखा पड़ा है। इन दिनों वन विभाग का वन महोत्सव सप्ताह अभियान चल रहा है, इसके तहत विभाग वन क्षेत्र में पर्यावरण का हराभरा रखने के लिए विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपता है।
वन क्षेत्राधिकारी गंगा सागर नौटियाल ने बताया कि मानसून की दस्तक के बाद बारिश नहीं होना चिंता का विषय है। जंगल में पानी के प्राकृतिक स्रोत नहीं हैं। बारिश होने पर हीं पौधों का विकास संभव है। यही वजह है कि पौधों को जंगल में रोपने की बजाय रेंज कार्यालय में टैंकर से पानी मंगवाकर उन्हें सुबह शाम सींच रहे हैं। बताया कि बारिश होने पर ही पौधों को जंगल में रोपा जाएगा।
बीते साल रोपे 16 हजार पौधे
रेंज कार्यालय के मुताबिक वर्ष 2015 में मानसून पूरी तरह से मेहरबान रहा। जुलाई से पहले ही आसमान में छाए बादल जमकर बरसे, तब जंगल में करीब 16 हजार नए पौधे रोपे, लेकिन इस बार आसमान में बादल मंडरा रहे हैं और बिन बरसे फुर्र हो रहे हैं। समय से बारिश नहीं होना चिंता बढ़ा रहा है।
इन प्रजातियों के पौधे
वर्ष 2016 में जंगल में कनक चंपा, कचनार, बहेड़ा, आंवला और बास के करीब 21 हजार पौधे रोपे जाने हैं, जिन्हें बारिश का इंतजार है।