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गंगा में गंदगी की थाह नापने में जुटी आईआईटी की टीम

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। गंगा में किस तरह का फेंका जा रहा है। गंगा को स्वच्छ रखने का समाधान क्या है? इसी थीम पर आईआईटी खड़गपुर (पश्चिम बंगाल) और नेशनल जियोग्राफी की टीम इन दिनों गंगा किनारे बसे शहरों के सर्वे में जुटी हुई है। यहां सर्वे किया जा रहा है कि गंगा में किस तरह का कूड़ा पड़ रहा है। साथ उस वर्ग को भी टटोला जाएगा जो सबसे ज्यादा कचरा उत्सर्जन कर रहा है। सर्वे की टीम इन डोर टू डोर और घाटों पर लोगों से संवाद कर रही है। यहां तलाश किया जा रहा है कि गंगा के समीप बसे क्षेत्रों में कौन सा कचरा कितनी मात्रा में फैला है।
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टीम की ओर से अब तक निगम क्षेत्र में तीन जगहों से सैंपल लिए जा चुके हैं। शुक्रवार को भी नेशनल जियोग्राफी और आईआईटी खड़गपुर की टीम त्रिवेणी घाट से सैंपल इकट्ठा करेगी। आईआईटी खड़गपुर से आई चार सदस्यीय टीम में अमित पीएचडी अंतिम वर्ष, गौरव वर्मा एमटेक द्वितीय वर्ष, संदीप प्रोजेक्ट स्टॉफ, राजेश प्रोजेक्ट स्टॉफ शामिल हैं। टीम ने तीन जगहों चंद्रेश्वर नगर (निम्न स्तर), शांतिनगर (मध्य स्तर) और देहरादून रोड (उच्च स्तर) स्थित घरों से कूड़े के सैंपल लिए हैं। इसके बाद सभी सैंपलों पर आईटीआई खड़गपुर में शोध किया जाएगा। किस कूड़े में किन तत्वों की कितनी मात्रा है इस पर रिपोर्ट जारी की जाएगी।
देश के इन शहरों में होगा सर्वे
ऋषिकेश। आईआईटी खड़गपुर से पीएचडी के अंतिम वर्ष के छात्र अमित ने बताया कि प्रोफेसर बृजेश कुमार दूबे की देखरेख में प्रोजेक्ट संचालित हो रहा है। इसके तहत ऋषिकेश के अलावा गंगा किनारे बसे अन्य शहरों राजघाट, नरोरा, कन्नौज, वाराणसी, साहिबगंज, पटना में भी सर्वे किया जाएगा। इसके लिए पांच टीमें बनाई गई हैं। सर्वे में घरों में कौन सा कूड़ा कितना प्रयोग किया जा रहा है? गंगा में कितने प्रकार का कूड़ा डाला जा रहा है? इन बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी के बाद शोध रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब एक वर्ष का समय लगेगा।
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