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बेटे की चाहत में बेटियों को अनदेखा करने से हो रही कन्या भ्रूण हत्या

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प्रतीकात्मक
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ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती । कन्या भ्रूण हत्या महिला की गरिमा के लिए एक अभिशाप है। जिस दिन हमारा समाज बेटियों की अहमियत को समझने में कामयाब होगा, उस दिन कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकती है। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को जागरूक होने के साथ ही दूसरों को भी सजग करने की आवश्यकता है। सोमवार को बैराज स्थित वीरभद्र मंदिर परिसर में आयोजित अमर उजाला की ओर से मिशन अपराजिता- 100 मिलियन स्माइल्स महा अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी रजनी ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में काफी हद तक कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगी है। अभी समाज में कुछ लोग बेटे की चाहत में लड़की को अनदेखा करते हैं, जो कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा देता है।

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वर्तमान में बेटियां किसी से कम नहीं हैं। वह हर क्षेत्र में परचम लहरा कर देश के विकास में अपना सहयोग कर रही हैं। सरकार ने समाज में हर बुुराइयों को रोकने के लिए कानून तो बनाए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पूरी तरह से पालन नहीं होता है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए भी सरकार ने सख्त कानून तो बनाया है, लेकिन चोरी छिपे अभी कई लोग भ्रूण परीक्षण के अपराध को अंजाम दे रहे हैं। कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह से रोक लगाया जाना अनिवार्य है। इसके सरकार को जन जागरुकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

- कन्या भ्रूण हत्या सामाजिक ताने बाने के खिलाफ है। बेटा बेटी को समान नजरिए से देखने की जरूरत है। जागरुकता के अभाव में अभी कई लोग बेटी से ज्यादा बेटों को ज्यादा अहमियत देते हैं। यह बिलकुल गलत है।
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- कमला गौड़, समाज सेविका

- बेटा हो या बेटी, जन्म लेने का अधिकार सबको है। भगवान के इस उपहार और अधिकार को मनुष्य कैसे बदल सकता है। इसके लिए ऐसे लोगों को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। इसको रोकने के लिए जागरूक होने की आवश्यकता है।
- रामी पाल गृहणी

बेटियों के प्रति वर्तमान में काफी हद तक लोगों की सोच तो बदल गई है लेकिन अभी भी कई लोगों की मनोदशा चिंताजनक है। बेटा खानदान का उत्तराधिकारी होता है, इसके लिए बेटों को जन्म देना जरूरी है। हमें ऐसे लोगों की सोच को बदलने की जरूरत है।
- अंजू शर्मा समाजसेविका

वर्तमान में बेटियां किसी बेटों से कम नहीं है। बेटियों ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहराकर समाज में यह साबित भी कर दिया है। आज बेटियां बेटों के मुकाबले हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। बेटियां हर क्षेत्र में उड़ना चाहती हैं इसके लिए उन्हें खुला आसमां चाहिए।
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- रजनी बिष्ट समाज सेविका

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