लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रतबाढाब-धूमाकोट राज्य राजमार्ग महज नाम का स्टेट हाईवे बनकर रह गया है। राजमार्ग का यमकेश्वर प्रखंड क्षेत्र का एक भी पैच राजमार्ग के मानकों को पूरा नहीं करता। जगह-जगह सड़क पर भू-धंसाव और गड्ढों में तब्दील स्टेट हाईवे पर 15 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से वाहन रेंगने को मजबूर हैं।
वैकल्पिक मार्ग के अभाव में हाईवे पर हिचकोले खाते वाहनों में बैठे पैसेंजरों को जान हथेली पर रखकर सफर करना मजबूरी है। हाईवे पर नियमित वाहन संचालित करने वालों की मानें तो बड़े-बड़े गड्ढों के कारण कम रफ्तार से और पहले, दूसरे गियर में वाहन चलाने से ईंधन की खपत भी दोगुनी हो गई है।
यमकेश्वर प्रखंड में अगस्त 2014 में आई आपदा के जख्म अभी भरे नहीं हैं। यहां जलप्रलय के दौरान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए स्टेट हाईवे पर यात्रा करना दुश्वारियों भरा साबित हो रहा है। कई स्थानों पर राजमार्ग के धंसने से बने भारी गड्ढे और हाईवे अत्यधिक संकरी होने से लोग जान हथेली पर लेकर सफर को मजबूर हैं।
लेकिन एडीबी आपदा मद में शासन से नवंबर 2014 में 36.36 करोड़ की वित्तीय मंजूरी के बाद भी संबंधित विभाग हाईवे दुरुस्त करने को तैयार नहीं है। लोक निर्माण विभाग एडीबी आपदा डिवीजन पौड़ी के अफसरों की मानें तो जुलाई 2015 से स्टेट हाईवे के क्षतिग्रस्त 80 किमी पैच में निर्माण शुरू करा दिया गया है।
लेकिन फूलचट्टी से बिथ्याणी तहसील तक करीब 20 किमी पैच में कुछ स्थानों पर जारी पुश्तों की चिनाई का कार्य छोड़ दें तो कहीं भी सड़क पर निर्माण कार्य नजर नहीं आता। आपदा में जिन स्थानों पर हाईवे 20 से 30 मीटर तक ढह गया था, उनमें लगभग छह महीने बाद भी समतलीकरण और डामरीकरण कार्य तक नहीं हो पाया है।
लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम टूरिस्ट टैक्सी ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भगत सिंह पयाल, पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा, वाहन चालक गोकुल सिंह, रविंद्र सिंह का कहना है कि पीडब्लूडी एडीबी डिवीजन पूरे मार्ग पर कहीं भी निर्माण कार्य कराता नहीं दिख रहा। यात्रियों की परेशानी के मद्देनजर मजबूरी में क्षतिग्रस्त हाईवे पर वाहन संचालित करने पड़ रहे हैं। जगह-जगह बने गड्ढे और धंस रही सड़क पर जोखिम का सफर करना पड़ रहा है।
मार्ग पर निर्माण कार्य की प्रगति अपेक्षित नहीं है। पिछले दिनों गुणवत्ता की कमी के कारण डामरीकरण कार्य बंद कराना पड़ा। फिलहाल पुस्तों के निर्माण के आदेश दिए गए हैं। जिन स्थानों पर सड़क अत्यधिक खराब हो चुकी है, वहां आवागमन के लायक सुगम बनाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। जल्द समूचे मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा।-एसके बिरला, मुख्य अभियंता, पीडब्लूडी एडीबी आपदा, उत्तराखंड