ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। तीर्थनगरी में बिना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के चल रहे आश्रम और धर्मशालाओं पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शिकंजा कसने की तैयारी में है। ऐसे संस्थानों का सर्वे किया जाएगा जहां 20 से अधिक शौचालय संचालित हो रहे हैं। सर्वे करने के बाद उन संस्थानों के खिलाफ नोटिस जारी किया जाएगा, जिन्होंने अब तक एसटीपी स्थापित नहीं किया है। फिलहाल बोर्ड ने होटलों का सर्वे पूर्ण कर लिया है।
तीर्थनगरी क्षेत्र में करीब 150 आश्रम और धर्मशालाएं ऐसे हैं, जहां पर 20 से ज्यादा शौचालय संचालित हो रहे है। इसके बावजूद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दिशा निर्देशों के मुताबिक यहां पर एसटीपी स्थापित नहीं किया गया है। सीवरेज योजना लागू होने के बाद से तीर्थनगरी के गीता भवन, स्वर्गाश्रम ट्रस्ट, वानप्रस्थ, वेद निकेतन, हेमकुंट गुरुद्वारा, परमार्थ आश्रम सहित करीब 150 संस्थानों ने अभी तक अपने संस्थान में एसटीपी नहीं लगाया है। कई संस्थानों के पास तो सीवरेज का कनेक्शन तक नहीं है।
शुरूआती चरण में बोर्ड की ओर से तीर्थनगरी के आश्रम और धर्मशालाओं का सर्वे किया जाएगा। सर्वे में जो भी संस्थान एनजीटी की गाइडलाइन का पालन नहीं करते पाए जाएंगे, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। इस संदर्भ में परमार्थ निकेतन के प्रबंधक राम अनंत तिवारी का कहना है कि ये कोई फैक्ट्री नहीं है। दान पुण्य से चलने वाली संस्था है। इस समय परमार्थ निकेतन में पांच सौ शौचालय संचालित हैं। एसटीपी नहीं स्थापित किया गया है। वहीं हेमकुंट गुरुद्वारा के प्रबंधक नरेंद्र सिंह बिंद्रा का कहना है कि हाल ही में सीवरेज कनेक्शन के लिए चार लाख रुपये जमा करवाए गए हैं। एसटीपी की व्यवस्था नहीं है लेकिन बायो डायजेस्टर संचालित है। इससे गंदगी साफ हो जाती है।
कोट्स
बोर्ड ने तीर्थनगरी के होटलों पर सर्वे कर लिया है। अब आश्रम और धर्मशालाओं का सर्वे किया जाएगा। जिन भी संस्थानों में 20 से इससे अधिक शौचालय संचालित हैं और इनमें एसटीपी प्लांट नहीं लगाया गया है उनके खिलाफ नोटिस जारी किया जाएगा।
- अमित पोखरियाल, क्षेत्राधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड