ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
जहां स्कूल होने चाहिए थे वहां अवैध दुकानें संचालित हो रही हैं। शर्त थी कि परिसर में मौजूद कुएं को सुरक्षित रखा जाएगा। जमीनी हकीकत यह है कि कई दशक बीत जाने के बावजूद अनुबंध के मुताबिक न तो स्कूल खुला और न ही कुएं का अस्तित्व ही बच पाया।
ये नजारा है मुख्य बाजार, भरत मंदिर मार्ग स्थित कृष्णा माई धर्मशाला का। धर्मशाला की बेशकीमती संपत्ति तत्कालीन पालिका प्रबंधन को नारी उत्थान के उद्देश्य से दी गई थी।
कुएं का अस्तित्व गायब, सराफा की दुकान खुली
कृष्णा माई धर्मशाला में दुकान नंबर-6 अमीचंद के नाम आवंटित की गई थी। अमीचंद की मृत्यु के बाद दुकान पुत्री भगवती देवी के कब्जे में आ गई। कई वर्षों तक अफसर मृतक (अमीचंद) के नाम से किराएदारी का बिल भेजते रहे। बाद में यशपाल पंवार नामक व्यक्ति ने भगवती देवी के साथ दुकान की साझेदारी कर ली। इतना ही नहीं कुएं को पाटकर उस पर गैलरी बना दी गई और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी र्गईं। निगम के दस्तावेज इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि पंवार ज्वैलर्स अमीचंद की किराए की संपत्ति पर काबिज है जबकि व्यावसायिक संस्थान को तत्कालीन पालिका प्रबंधन की ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई है।
साझीनामा भगवती देवी और यशपाल पंवार का
निगम के दस्तावेजों के मुताबिक वर्तमान में भी कृष्णा माई धर्मशाला में किराएदार अमीचंद भूतल की संपत्ति के अध्यासी (कब्जेदार) हैं। कागजों में दर्शाया गया है कि इसमें पंवार ज्वैलर्स संचालित नहीं हो रहा है। हकीकत इससे उलट है।
म्युनिसिपल बोर्ड और ट्रस्ट के बीच हुए अनुबंध की अहम शर्तें
वर्ष 1963 में कृष्णा आश्रम स्त्री सत्संग भवन ट्रस्ट की ओर से निर्मित कृष्णा माई धर्मशाला म्यूनिसिपल बोर्ड, ऋषिकेश के सुपुर्द की गई थी। दान के समय कई शर्तों का भी लिखित उल्लेख किया गया। इसी के तहत अनुबंध किया गया कि आश्रम संपत्ति का उपयोग स्त्री समाज के लाभ व उन्नति के लिए किया जाएगा। शर्तों के मुताबिक आश्रम भवन में एक कन्या पाठशाला संचालित किया जाएगा। बाहर जो दुकानें हैं उन्हें किराए पर उठाकर कन्या पाठशाला और नारी उत्थान में खर्च किया जाएगा। जितनी भी योजनाएं संचालित होंगी उनमें माई कृष्णा देवी का उल्लेख जरूर किए जाएगा। इसके अलावा द्वितीय पक्ष यानी म्युनिसिपल बोर्ड के कर्मचारियों का यहां रहना सार्वजनिक कार्य नहीं माना जाएगा। कन्या पाठशाला पर संगमरमर के पत्थर पर कृष्णा माई का नाम लिखा जाएगा। अनुबंध के मुताबिक भवन में एक पक्का कुआं है जिसे कभी बंद नहीं किया जाएगा। शर्तों में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि म्युनिसिपल बोर्ड अनुबंधों को पालन नहीं करता है तो करार स्वत: समाप्त माना जाएगा।
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आपको ये जानकारियां कहां से मिलती हैं। धर्मशाला में स्कूल कैसे चल सकता है। खर्च कहां से आएगा। यदि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर संपत्ति करार निरस्त होने का नियम है तो हो जाए...क्या करें। हमें तो जानकारी ही नहीं है इसकी।
-प्रेमलाल, मुख्य नगर आयुक्त
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मेरी दुकान अवैध बिल्कुल नहीं है। भगवती देवी के साथ अनुबंध में भी कोई अनियमितता नहीं बरती गई है। मेरे पास दस्तावेज हैं। पूर्व में अनुमति के बगैर निर्माण करने पर दस हजार का जुर्माना लगाया जा चुका है।
-यशपाल पंवार, संचालक, पंवार ज्वैलर्स