ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। गंगा तट पर लगातार हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर एचआरडीए (हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण) अफसर अब हरकत में आए हैं। इसी क्रम में एचआरडीए के सचिव, अधिशासी अभियंता और जेई की टीम मंगलवार को गंगा किनारे हो रहे अवैध निर्माणों का जायजा लेगी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों के बावजूद जारी अवैध गतिविधियों को लेकर अमर उजाला ने सोमवार कोे खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद अफसरों ने तत्परता दिखानी शुरू की है।
बता दें कि गंगा तट से 200 मीटर के दायरे में निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। हकीकत यह है कि आदेशों का पालन केवल कागजों में ही हो रहा है, लोगों ने गंगा तट से 10 मीटर दूरी पर ही अवैध निर्माण कर दिए हैं। पूर्व में जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने भी एचआरडीए सहित सभी उपजिलाधिकारियों को गंगा किनारे हुए निर्माणों का ब्योरा देने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद निर्देश और ब्योरे हवा में उड़ गए। असलियत यह है कि वर्तमान में एचआरडीए के पास कोई ऐसी सूची है ही नहीं जो स्पष्ट कर सके कि गंगा किनारे कितने नए पुराने निर्माण हो चुके हैं।
नियमों पर अमल की सारी कसरत दफ्तरों में बैठकर चल रही है। इस कार्यप्रणाली का नतीजा यह है कि अफसरों की नाक के नीचे गंगा किनारे कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि एचआरडीए के अफसर अब मुनिकीरेती से लेकर वीरपुर खुर्द तक हो रहे अवैध निर्माणों का जायजा लेने का मूड बनाया है।
कोट्स
मंगलवार को सचिव भी ऋषिकेश में रहेंगे। मैं भी आ रहा हूं। पूरी टीम के साथ गंगा किनारे हो रहे अवैध निर्माणों का जायजा लिया जाएगा। नियम विरुद्घ कार्य हो रहे हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- श्याम मोहन शर्मा, अधिशासी अभियंता, एचआरडीए