ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भारतीय पेलिएटिव केयर सोसायटी की ओर से संचालित द्वितीय सर्टिफिकेट कोर्स शुरू हो गया है। चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ को पेलिएटिव केयर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखंड के सभी जिला अस्पतालों से 27 डॉक्टर व स्टाफ नर्स प्रतिभाग कर रहे हैं। सोमवार को एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कैंसर व अन्य लाइलाज बीमारियों के लिए पेलिएटिव केयर एक वरदान है।
जब कैंसर और अन्य लाइलाज बीमारियों के मरीजों पर दवाओं का बहुत अधिक प्रभाव नहीं रह जाता, तब उन्हें पेलिएटिव केयर की नितांत आवश्यकता होती है। पेलिएटिव केयर का मुख्य उद्देश्य ऐसे मरीजों की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति को बेहतर बनाए रखना है। इसी के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेलिएटिव केयर को बढ़ावा देने के लिए नेशनल हेल्थ प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक राज्य के जिला अस्पतालों के चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ को पेलिएटिव केयर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बताया कि पेलिएटिव केयर की सुविधा प्रदान करने के लिए संस्थान उत्तराखंड में नोडल सेंटर के तौर पर कार्य करेगा और राज्य के हर हिस्से से आने वाले कैंसर एवं अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को पेलिएटिव केयर की सुविधा प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि संस्थान में मंगलवार व शुक्रवार को पेलिएटिव केयर की ओपीडी संचालित की जा रही है। इस मौके पर एम्स दिल्ली की प्रो. सुषमा भटनागर ने बतौर नेशनल फेकल्टी पहले दिन चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि पेन व पेलिएटिव केयर में मार्फिन दवा संबंधित मरीज के लिए रामवाण का काम करती है। उन्होंने इस दवा की खरीद, रखरखाव व वितरण की विस्तृत जानकारी दी।
संस्थान की डीन प्रो. सुरेखा किशोर ने बताया कि संस्थान में इस कोर्स का संचालन नियमित तौर पर किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी डॉक्टर व नर्स मरीजों को पेलिएटिव केयर के लिए दक्ष हो सकें। इस अवसर पर डॉ. फरीदू जफर, डॉ. कुमार सतीश रवि, डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. योगेश, डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. ब्रेंडा आदि मौजूद रहे।