सुदूरवर्ती इलाकों में प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देगा एम्स
ब्यूरो/अमर उजाला
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से वर्ष 2014 एमबीबीएस के बैच के विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप ओरिएंटेशन कोर्स शुरू कर दिया गया है। इस दौरान छात्रों को कार्डियक अरेस्ट से बचाव के लिए कार्डियो पल्मनरी रिससिकेशन सीपीआर का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि आने वाले समय में संस्थान प्रदेश के सुदूरवर्ती इलाकों में लोगों को कार्डियक अरेस्ट व प्राथमिक उपचार के लिए प्रशिक्षित करेगा।
एम्स निदेशक ने बताया कि बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) की ट्रेनिंग की शुरुआत छात्र-छात्राओं को एमबीबीएस प्रथम वर्ष से ही दी जानी चाहिए। जब विद्यार्थी इंटर्नशिप में पहुंचें तब उन्हें अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन सर्टिफाइड बेसिक लाइफ सपोर्ट कोर्स की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए। जीवन अमूल्य है, लिहाजा उसे बचाने के लिए बीएलएस ट्रेनिंग आवश्यक है।
डॉ. सुनील आहूजा व डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में हृदय असामान्य धड़कन विकसित करता है। ऐसे में हार्ट पंप नहीं कर पाता। दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में रक्तवाहिनियों में अवरोध पैदा हो जाता है। हृदय के किसी एक हिस्से में रक्त का संचार बंद हो जाता है, जिससे उस हिस्से की कोशिकाएं समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में सांस व पल्स दोनों बंद हो जाती हैं। लिहाजा व्यक्ति हिलाने डुलाने पर कोई रिस्पांस नहीं करता। हार्टअटैक में सांसे चल रही होती हैं पल्स भी मिलती हैं, व्यक्ति छाती में दर्द, पसीना आने की शिकायत करता है।
इस मौके पर प्रो. शालिनी राव, डॉ. भरत भूषण, डॉ. अरुण मोहंती, डॉ. अरुण बर्गिस, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. क्रांति रेड्डी, डॉ. पद्मानिधि, डॉ. कर्नव जैन, रूपेंद्र देयोल, हेमंत कुमार, जेवियर बेल्सी आदि मौजूद थे।