योगनगरी में गंगा का नैसर्गिक स्वरूप और पर्यटक स्थल देश विदेश के पर्यटकों का आकर्षण केंद्र रहे हैं। यही कारण है ऋषिकेश ने योगनगरी और पर्यटन नगरी जैसे उपनामो से विश्व भर में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। लक्ष्मणझूला, रामझूला, चौरासी कुटिया, परमार्थ निकेतन, त्रिवेणी घाट, स्वर्गाश्रम, तपोवन योगनगरी की पहचान के मजबूत स्तंभ बने। वहीं तपोवन, शिवपुरी, हेंवल घाटी स्थित जंगल कैंप और आलीशान कैंपिंग रिजॉर्ट पर्यटकों की पसंद बन गए। राफ्टिंग और स्पीड बोटिंग भी रोमांच के शौकीनों को अपनी ओर खींच लेती है। वीकेंड पर ऋषिकेश में पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है। यहां 10 पर्यटक स्थल सैलानियों को सुकून देते हैँ तो 10 समस्याएं कभी न भूलने वाला कड़वा अनुभव भी दे जाती है। जाम, पार्किंग, गंदगी, आवारा पशु जैसी दस समस्याओं से ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों को दो चार होना पड़ता है।
समस्याएं
- जाम - नेपाली फार्म पार करते ही पर्यटकों का स्वागत जाम से होता है। वीकेंड पर श्यामपुर फाटक से चौकी तब पहुंचने में पर्यटकों को घंटों का समय लग जाता है। मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी में पर्यटकों के वाहन रेंगते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं।
- पार्किंग- योगनगरी में पार्किंग का अभाव है। ऋषिकेश में बाहर से आने वाले पर्यटकों के वाहन के कोई पार्किंग नहीं। इसके चलते पर्यटकों को मजबूरी में वाहन खड़ा करना पड़ता। कई बार पुलिस पर्यटकों के चालान भी करती है। स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती और तपोवन क्षेत्र में सीमित संख्या में पार्किंग होने के चलते पर्यटकों को रात को भी सड़क पर वाहन खड़ा करना पड़ता है।
- आवारा पशु - ऋषिकेश बाजार, स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती और तपोवन क्षेत्र में आवारा पशु बड़ी समस्या है। आवारा पशु बाजारों और पर्यटक स्थलों के आसपास घूमते रहते हैं। कई बार आवारा पशु आपसी संघर्ष के दौरान पर्यटकों का घायल भी कर देते हैं।
- गंदगी - योगनगरी में पर्यटन स्थलों और बाजारों में दिनभर गंदगी पसरी रहती है। स्वर्गाश्रम, ऋषिकेश और तपोवन क्षेत्र के पर्यटकों स्थलों, गंगा घाटों और प्राकृतिक तटों पर गंदगी न उठने के चलते पर्यटक बैठ तक नहीं पाते हैं। वहीं बाजारों में आवारा पशुओं के मल से दिनभर दुर्गंध उठती रहती है।
- अतिक्रमण - योगनगरी में बाजारों में हर ओर अतिक्रमण पसरा हुआ। घाट रोड़, स्वर्गाश्रम क्षेत्र, तपोवन क्षेत्र में सड़कों फड़ लगी रहती है। कई व्यापारियों ने सामान बाहर रख फुटपाथ पर कब्जा कर लिया है। बाजारों और पर्यटन स्थलों के आसपास सब्जी, फलों की रेहड़ी, चाट पकौड़ी, चाय और फास्ट फूड की दुकानें सजी रहती है। सब्जी और फलों के रेहड़िया दिनभर बाजारों में घूमती रहती है।
- दोपहिया वाहन- स्वर्गाश्रम, तपोवन और घाट चौक पर दोपहिया वाहन बाजारों और पर्यटक स्थलों के आसपास ही फर्राटा भरते हैं। बैरिकेड पर भी वाहनों को नहीं रोका जाता है। कई बार पर्यटक वाहनों से घायल होते हैं। सड़क पर आड़े तिरछे खड़े दोपहिया वाहनों के चलते पर्यटकों के वाहन पार्किंग तक नहीं पहुंच पाते हैं।
- संकरी सड़कें - ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती और तपोवन क्षेत्र की सड़क बहुत ही संकरी है। यहां सड़कों पर चलना पर्यटकों के मुश्किल हो जाता है। वहीं कई सड़के तो जिसमे आमने सामने से वाहन नहीं निकल पाते हैं।
- फक्कड़ और नशेड़ी - गंगा घाटों पर फक्कड़ और नशेड़ियों के चलते पर्यटकों को फजीहत झेलनी पड़ती है। स्वर्गाश्रम, अस्थापथ, त्रिवेणी घाट और तपोवन क्षेत्र के आसपास फक्कड़ों और नशेड़ियों का डेरा लगा रहता है। शाम को स्मैक, चरण और शराब के नशे में फक्कड़ और नशेड़ी जमकर उत्पात मचाते हैैं।
- शौचालय - स्वर्गाश्रम और तपोवन क्षेत्र में केवल गिने चुने स्थानों पर शौचालय हैं। सार्वजनिक शौचालयों के अभाव के चलते खासकर पर्यटकों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। पर्यटक स्थलों के आसपास भी सार्वजनिक या मोबाइल शौचालय की व्यवस्था नहीं हैं।
- पेयजल - मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम और तपोवन क्षेत्र में सीमित संख्या में प्याऊ और वाटर कूलर हैं। इसके चलते पर्यटकों बोतल बंद पानी खरीदना पड़ता है।
पर्यटक स्थल
1. लक्ष्मणझूला - पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रीराम के अनुज लक्ष्मण ने इसी स्थान पर जूट की रस्सियों के सहारे नदी को पार किया था। स्वामी विशुदानंद की प्रेरणा से कोलकाता के सेठ सूरजमल झुहानूबला ने यह पुल वर्ष 1889 में लोहे के मजबूत तारों से बनवाया। यह पुल वर्ष 1924 की बाढ़ में बह गया। इसके बाद नया पुल बनाया गया। यह पुल पर्यटकों के मुख्य आकर्षण कर केंद्र है। शाम को रोशनी के चमकता पुल पर चहलकदमी करते हुए लोग रोमांच का अनुभव करते हैं।
2. रामझूला - रामझूला पुल कब का निर्माण 1980 में हुआ था। यह पुल शिवानंद आश्रम से स्वर्गाश्रम क्षेत्र को जोड़ता है। इसको शिवानंद झूलापुल के नाम से भी जाना जाता है। शाम को ठंडी हवाओं के झोंकों के बीच गंगा को निहारते हुए लोग इस पुल पर सैर करते हैं।
3. नीलकंठ महादेव मंदिर - नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है। पौराणिक मान्यता है कि शिव ने समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। शिव ने विष को गले में रोग लिया था, जिससे उनकी कंठ नीला पड़ गया। शिव ने विषपान के बाद इसी स्थान पर तपस्या की थी। यहां देशभर से शिवभक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए आते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान यहां शिवभक्तों का हुजूम उमड़ता है।
3. चौरासी कुटिया (बीटल्स आश्रम)- वर्ष 1961 में महर्षि महेश योगी ने राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 7.5 हेक्टेयर वन भूमि में चौरासी कुटिया आश्रम का निर्माण किया था। उन्होंने करीब 40 वर्षों के लिए वन भूमि को लीज पर लिया था। इस दौरान उन्होंने आश्रम में 140 गुंबदनुमा कुटिया और 84 छोटी-छोटी ध्यान योग की कुटिया व अन्य निर्माण किया था। वर्ष 1968 में इंग्लैंड का मशहूर बीटल्स ग्रुप के चार सदस्य जॉन लेनन, पॉल मेकार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार चौरासी कुटिया में ध्यान, योग करने के लिए आए थे। जिसके बाद से चौरासी कुटिया विदेशी पर्यटकों में खासी लोकप्रियता हासिल की थी। हर साल हजारों विदेशी पर्यटक चौरासी कुटिया के दीदार के लिए ऋषिकेश पहुंचते हैं।
4. स्वर्गाश्रम - स्वर्ग आश्रम ऋषिकेश से 5 किमी की दूरी पर गंगा नदी के पूर्वी तट पर स्थित है। इस आश्रम को लोकप्रिय हिन्दू संत विशुद्धानंद के सम्मान में बनवाया गया था जिन्हें काली कमली वाले बाबा के रूप में भी जाना जाता है। स्वर्गाश्रम क्षेत्र में गंगा लाइन पर बने प्राकृतिक घाट पर्यटकों पसंदीदा सैरगाह हैं। यहां दिनभर पर्यटक गंगा में अठलेखियां करते नजर आते हैं।
5. परमार्थ निकेतन - वर्ष 1942 में संत सुकदेवानन्द जी महाराज (1901 1965) ने स्वर्गाश्रम क्षेत्र में गंगा तट के किनारे परमार्थ निकेतन की स्थापना थी। वर्ष 1986 स्वामी चिदानन्द सरस्वती अध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरु के रूप में परमार्थ निकेतन की बागडोर संभाल रहे हैं। आश्रम की संध्याकालीन गंगा आरती, योग गतिविधियां और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों विश्व भर में ख्याति मिली है। विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में योग और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए परमार्थ निकेतन आते हैं।
6. त्रिवेणी घाट - पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रिवेणी घाट को गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम माना जाता है। त्रिवेणी घाट से गंगा की धारा दायीं ओर परिवर्तित हो जाती है। यहां शिव पार्वती की मूर्ति और अर्जुन को गीता का ज्ञान देते कृष्ण की विशाल प्रतिमा और गंगा मंदिर आस्तिकों की श्रद्धा के केंद्र हैं। यहां की गंगा आरती भी विश्वप्रसिद्ध है।
7. तपोवन - पौराणिक मान्यता है कि गुरु द्रोणाचार्य ने यहां तपस्या की थी। पौराणिक लक्ष्मण मंदिर से तपोवन पूर्व में जाना जाता था। अब गंगा किनारे आलीशान होटल, कैंपिंग रिजॉर्ट, जंगल कैंप में पर्यटकों को खूब भाते हैं। यहां होटलों और कैंपिंग रिजार्ट, जंगल कैंप में लोग प्रकृति के बीच आराम फरमा कर स्वयं को तरोताजा महसूस करते हैं।
8. शिवपुरी - शिव के नाम पर इस स्थान शिवपुरी पड़ा। यह छोटा सा ग्रामीण क्षेत्र गंगा नदी के तट पर बसा है। यह स्थान गंगा के किनारे है। देशभर से पर्यटक शिवपुरी में राफ्टिंग के रोमांच का मजा लेने आते हैं। यहां कैपिंग रिजॉर्ट और जंगल कैंप भी पर्यटकों की मनपसंद आरामगाह बन गए हैं। शिवपुरी के प्राकृतिक घाट भी पर्यटक खूब मौज मस्ती करते हैं। शिवपुरी से 14 किलोमीटर दूर मालाकुंटी क्षेत्र प्री वेडिंग शूट के लिए मशहूर है। यहां स्थित झूलापुल और प्राकृतिक घाट पर सबसे शादी से पहले जोड़े फोटो सेशन कराते हैं।
9 . जानकी सेतु- नवंबर 2029 में शानदार इंजीनियरिंग के नमूने जानकी पुल का लोकार्पण हुआ था। यह पुल टिहरी और पौड़ी जिले को जोड़ता है। रात को लाइटों से जगमगाते पुल की रोशनी जब गंगा तल पर पड़ती तो यह जादू सा लगता है। पर्यटक यहां चहलकदमी करते हुए जमकर सेल्फी लेते हैं।
10 हेंवल घाटी - मणिकूट पर्वत माला तलहटी में स्थित इस क्षेत्र से हेंवल नदी होकर गुजरती है। यहां कैंपिंग रिजॉर्ट और जंगल कैंप में पर्यटकों को लुभाते हैं। यहां लोग प्रकृति और नदी के धारा के बीच परिवार के वीकेंड और छुट्टियां बिताने आते हैं।