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चीड़ के पेड़ों से चिपक कर बिताई रात

Sat, 22 Jun 2013 12:51 PM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
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आपदा में फंसे यात्रियों को जिला मुख्यालय तक पहुंचाने के लिए गंगोत्री हाईवे खोलने की युद्ध स्तर पर तैयारी नजर आ रही है। 5-6 दिनों से डबराणी, गंगनानी की ओर से पैदल आ रहे यात्रियों के लिए प्रशासन की ओर से भोजन-पानी का भी इंतजाम नहीं है।
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नौलुणा में तबाह सड़क पार करने के लिए बेगुसराय बिहार के यात्रियों को ढलवां पहाड़ी पर चीड़ के पेड़ों से चिपक कर रात बितानी पड़ी।

उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज

पुलिस कर्मी भी तैनात नहीं थे
बेगुसराय के 40 यात्रियों के ग्रुप के साथ चल रहे राधेश्याम सिंह कहते हैं जब प्रशासन को मालूम है कि नौलुणा से रोजाना सैकड़ों यात्री पहाड़ी पार कर मनेरी उतर रहे हैं, तो इस ट्रैक पर लाल रिबन बांध कर पथ संकेत तो लगा ही सकता था। रास्ता दिखाने के लिए पुलिस कर्मी भी तैनात नहीं थे।

इलाहबाद के आरके तिवारी तथा सूरत गुजरात की कल्पना बेन ने भी यही पीड़ा बयां की।

खरी-खोटी सुनाई
बडोली सूरत गुजरात के हरीश भंडारी नानूभाई तथा रमीला बहिन सहित 56 यात्रियों का ग्रुप उत्तरकाशी से गंगोत्री की ओर 44 किमी दूर फंसा था। इन्हें उत्तरकाशी तक का सफर तय करने में छह दिन लगे। बच्चे-बूढ़ों सहित बीमार लोगों के इस ग्रुप के यात्रियों ने जिला मुख्यालय पहुंचने पर आपदा परिचालन केंद्र में बैठे अधिकारियों को व्यवस्था के नाम पर यात्रियों के लिए भोजन तो दूर एक बोतल पानी तक का इंतजाम न करने पर खरी-खोटी सुनाई।
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मां, मत रो, मैं जिंदा हूं

नानूभाई ने तो यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले गांव के प्रधानों पर भी गुस्सा उतारा। उन्होंने कहा कि ऐसे संकट की घड़ी में उन्हें आगे बढ़कर यात्रियों की मदद करनी चाहिए थी। यदि यह स्थिति गुजरात में होती तो वहां का सरपंच सीधे मुख्यमंत्री से संपर्क कर यात्रियों की मदद करवाता। यहां तो अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी स्थिति है।

बीमार, विकलांग कर रहे हेलीकाप्टर का इंतजार
दो छोटे बच्चों, भाई और पति के साथ गंगोत्री की यात्रा पर आई इंदिरा द्विवेदी दोनों पैरों से विकलांग हैं। उनकी गाड़ी मल्ला में फंसी है। प्रशासन ने उन्हें हेलीकाप्टर से देहरादून पहुंचाने का आश्वासन देकर भटवाड़ी इंटर कालेज के मैदान में पहुंचने को कहा। पति मनोज तथा भाई पुष्पेंद्र उन्हें कंधों पर ढोकर 5 किमी दूर भटवाड़ी इंटर कालेज ले गए।

किंतु तीन दिन इंतजार के बाद भी वहां हेलीकाप्टर नहीं पहुंचा। विकलांग इंदिरा ही नहीं कई बीमार और पैदल चलने में असमर्थ लोग भटवाड़ी, मनेरी सहित यात्रा मार्ग के कई पड़ावों पर हेलीकाप्टर की मदद से बाहर निकलने की उम्मीद में कई दिनों से भूखे प्यासे वहीं बैठे हैं।
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