गंगोत्री घाटी में पांच दिनों से फंसे यात्रियों के लिए ग्रामीण भगवान से बढ़कर हैं। ग्रामीण न केवल यात्रियों को खाना खिला रहे, बल्कि बुजुर्ग यात्रियों को उत्तरकाशी लाने में भी मदद कर रहे हैं।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
जिले में दर्जनों संस्थाएं काम कर रही हैं, लेकिन आपदा की इस घड़ी में चंद संस्थाएं ही पीड़ितों के मदद को खड़ा दिख रही है। गंगोत्री मार्ग पर पड़ने वालों गांवों के ग्रामीण यात्रियों के लिए भगवान बने हुए हैं। ग्रामीण यात्रियों का अतिथियों की तरह सत्कार कर रहे हैं।
गणेशपुर महिला मंगल दल व नवयुवक मंगल दल से जुड़ी शिवदेई, अबला देवी, बलवीर मखलोगा, विजय लक्ष्मी नौटियाल, पुष्पा चौहान आदि ने आटा व सब्जियां एकत्रित कर प्रतिदिन 200 से 300 यात्रियों को भोजन करा रहे हैं।
मैं जिंदा हूं
गंगोरी व बाड़ाहाट के युवा पैदल रास्ते में न केवल यात्रियों को पानी पिला रहे हैं, बल्कि बुजुर्ग यात्रियों को उत्तरकाशी तक लाने में भी मदद भी कर रहे हैं। सुक्की गांव में भी सैकड़ों यात्री गांव में शरणार्थी के रूप में शरण लिए हुए हैं। ऐसे में गंगोत्री घाटी से उत्तरकाशी पहुंचने वाले यात्री न गंगा न यमुना बल्कि ग्रामीणों को अपना भगवान समझ कर दुआएं दे रहे हैं।
शरीर टूटने लगा था
गुजरात की नानू बेन व लुंबनी नेपाल फूलमती कुरमी बताती है कि यदि आसपास गांव नहीं होते तो शायद अब तक जान चली जाती। 18 जून को गगनानी से मनेरी पैदल पहुंचते ही भूखे-प्यासे शरीर टूटने लगा था, लेकिन गांव के ग्रामीणों का शुक्र हैं, जिन्होंने हमें खाना खिलाया।
हमारे लिए तो गांव वाले भगवान से बढ़कर है। इसी तरह गंगोत्री से लौटने वाले अधिकत्तर यात्री ग्रामीणों का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।