मौके पर यदि पुलिस हस्तक्षेप न करती तो कुछ भी हो सकता था।
- फोटो : Demo pic
न अब पहले जैसी वीआईपी ड्यूटी की मारामारी है और न ही सचिवालय पर आंदोलनों की श्रंखला। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से राजधानी में पुलिस की बल्ले-बल्ले है, क्योंकि काम के दबाव का ग्राफ नीचे आ गिरा है।
भागदौड़ कम होने के साथ ही पुलिस अपने मूल काम की तरफ लौटी है। कई दिनों से जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर पुलिस की गंभीरता कम से कम यहीं जाहिर करती है।
राज्य बनने के बाद से पुलिस वीआईपी ड्यूटी में मशगूल रही
उत्तराखंड पुलिस भी राष्ट्रपति शासन का पहली बार अहसास कर रही है, क्योंकि राज्य बनने के बाद से पुलिस वीआईपी ड्यूटी में मशगूल रही है।
इसके अलावा सचिवालय कूच के रोजमर्रा के प्रदर्शनों और आंदोलन में पुलिस का समय जाया होता है। सूबे में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से पुलिस पर काम का दबाव स्वत: ही कम हो गया। साथ ही पुलिस बल की उपलब्धता भी बढ़ी है।
वीआईपी ठिकानों की परिक्रमा कम होने के साथ अब अधिकारी न केवल पूरा समय आफिस में दे रहे है, बल्कि पुलिस को प्रभावी बनाने के लिए दूसरे तरह की कार्रवाई भी आगे बढ़ा रहे है।
पुलिस ने सड़कों पर आकर जनता की समस्याओं के निस्तारण की पहल की है। कई इलाकों में पुलिस के अतिक्रमण हटाओ अभियान से थोड़ी बहुत राहत मिली है।
राष्ट्रपित शासन का सुखद पहलू, पुलिस का काम पटरी पर लौटा
पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
शहर में रहने वाले बाहरी लोगों के सत्यापन प्रक्रिया में तेजी आई है। ऑटो संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रीपेड ऑटो सर्विस लागू की है।
एक पुलिस अधिकारी ने माना कि राष्ट्रपति शासन का सुखद पहलू यह है कि पुलिस का काम पटरी पर लौट आया है। वांछितों की
गिरफ्तारी, विवेचनाओं और शिकायतों के निस्तारण में तेजी आई है, जिससे पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।
200 वाहन चालको का किया गया सत्यापन
पुलिस द्वारा शुक्रवार को दो घंटे के चलाए गए अभियान में 200 दोपहिया वाहन चालकों का सत्यापन किया गया है। एसपी सिटी
अजय सिंह ने बताया कि शाम छह से बजे से लेकर रात्रि आठ बजे तक शहर क्षेत्र में दोपहिया वाहन चालकों को रोककर मौके पर ही सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई है। आगे भी इसी तरह अभियान चलता रहेगा।