पिथौरागढ़। राजकीय निराश्रित महिला प्रशिक्षण केंद्र और कर्मशाला की महिलाएं कागज की थैलियां बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। कर्मशाला की महिलाएं लिफाफे बनाकर हर माह साढ़े तीन से चार हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
महिला कल्याण की ओर से पिथौरागढ़ के खड़कोट में संचालित राजकीय निराश्रित महिला प्रशिक्षण केंद्र और कर्मशाला में वर्तमान में 13 महिलाएं रह रही हैं। इनमें पांच छह महिलाएं ऐसी हैं जो मानसिक रूप से दिव्यांग हैं। केंद्र में जो महिलाएं सामान्य हैं वह रचनात्मक कार्यों में जुटी रहती हैं।
इन महिलाओं को केंद्र की ओर से बिनाई, पुराने अखबारों से कागज की थैलियां बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। महिलाएं इसमें दक्ष हो चुकी हैं। निराश्रित केंद्र की अधिकांश महिलाओं की रुचि कागजों की थैलियां बनाने में रहती है। हर माह कागज की थैलियां बेचकर होने वाली आय की धनराशि को महिलाओं के लिए दवाइयां और उनके सौंदर्य प्रसाधन पर खर्च किया जाता है।
केंद्र के अधिकारियों के अनुसार हर माह कागज की थैलियों से होने वाली आय के कारण महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना भी जग रही है। नियमित दवाइयां और देखरेख से मानसिक रूप से दिव्यांग महिलाओं के स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है।
कोट
केंद्र की महिलाओं को बिनाई और कागज की थैलियां बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। महिलाएं थैलियां बनाकर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। केंद्र का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को प्रशिक्षित करना है। समाज की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। - रवींद्र कुमार, प्रभारी अधीक्षक, राजकीय निराश्रित महिला प्रशिक्षण केंद्र एवं कर्मशाला, पिथौरागढ़।