शीत ऋतु में बारिश न होने का असर असिंचित क्षेत्रों में दिखने लगा है। इन क्षेत्रों में रवि सीजन में बोई गई फसल परिपक्व होने से पहले ही सूख गई है। किसानों ने गेहूं की कटाई शुरू कर दी है, जबकि इन क्षेत्रों में अन्य वर्ष अप्रैल अंत से मई पहले सप्ताह तक गेहूं की फसल तैयार होती थी।
नाचनी के असिंचित क्षेत्र भैंसखाल में महिलाएं सामूहिक रूप से गेहूं की बालियां एकत्रित करने लगी हैं। गेहूं की बालियां एकत्र कर रही आनंदी देवी, खीमा देवी, जयंती देवी, खिमुली देवी, हरूली देवी आदि का कहना है कि सूखे के कारण इस वर्ष गेहूं का दाना पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। इस अधूरे परिपक्व गेहूं का बीज भी नहीं बन सकता है। सूखे का असर जौं, मसूर, सरसों अन्य फसलों पर भी पड़ा है। पिछले वर्ष तक खरीफ की बुवाई के लिए कृषि महोत्सव के माध्यम से बीज, दवाइयां आदि जरूरतें पूरी हो जाती थी। इस वर्ष कृषि महोत्सव पर भी संशय है।
सिंचाई सुविधा होती तो होता उत्पादन
मोहनी देवी कहती हैं कि पिछले वर्षों तक इन्हीं खेतों से 6-7 क्विंटल गेहूं उत्पादित होता था, लेकिन इस वर्ष 2 क्विंटल गेहूं प्राप्त होना भी मुश्किल है। सिंचाई सुविधा होती तो अच्छा उत्पादन होता।
रामगंगा से लिफ्ट योजना का बना था प्रस्ताव
ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू कहती हैं कि गांव में सिंचाई सुविधा मुहैया कराने के लिए रामगंगा नदी से लिफ्ट योजना का प्रस्ताव भेजा गया था। सरकार की अस्थिरता के चलते योजना का प्रस्ताव पास होगा या नहीं होगा यही चिंता लगी है।
सूखा राहत का मुआवजा मिले
जिला पंचायत सदस्य खुशाल सिंह पिपलिया ने कहा कि क्षेत्र के टिमटिया, देगुना, बांसबगड़, भैंसकोट, कोट्यूड़ा समेत तमाम गांवों की फसल सूखे की भेंट चढ़ी है। किसानों को सूखा राहत का मुआवजा मिलना चाहिए।