पिथौरागढ़। बारिश रुकते ही फिर से जंगल धधकने लगे हैं। जिला मुख्यालय में उल्का देवी मंदिर के पास जंगल में लगी आग घरों तक पहुंच गई जिससे वहां रहने वाले लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वे घरों से बाहर निकल गए। सूचना पर पहुंची फायर सर्विस की टीम ने बमुश्किल आग बुझाकर नुकसान होने से बचाया।
बृहस्पतिवार दोपहर करीब 12 बजे उल्का देवी मंदिर के पास जंगल में अचानक आग लग गई। तेज हवाओं के साथ कुछ ही देर में आग घरों के पास तक पहुंच गई तो। इस पर लोग घरों को छोड़ सुरक्षित स्थान पर चले गए। कुछ लोगों ने इसकी सूचना दमकल कर्मियों को दी। इस पर फायर सर्विस की टीम वाहनों के साथ मौके पर पहुंची।
दमकल कर्मियों ने एक घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझाकर नुकसान होने से बचाया। इसके बाद लोगों ने घरों में जाने की हिम्मत जुटाई।
प्रभारी अग्निशमन अधिकारी नरेंद्र प्रसाद ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। बताया कि आग से वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि बीते दिनों हुई बारिश से वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगा था। अब फिर से जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आने से वन अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
पिथौरागढ़ : मौसम की मेहरबानी से वनाग्नि पर अंकुश, विभाग को राहत
बढ़ती गर्मी के चलते अधिकारी भी हुए सतर्क, जिले में बनाए हैं 68 क्रू स्टेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। इस साल मौसम की मेहरबानी से पिथौरागढ़ के जंगलों में वनाग्नि पर अंकुश लगा है। रुक-रुक कर हो रही बारिश ने नेचुरल फायर फाइटर का काम किया है जिससे वन विभाग ने बड़ी राहत की सांस ली है। विभाग ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए अलर्ट जारी रखा है। कुछ जगहों पर छुटपुट घटनाएं हुई लेकिन उन पर समय रहते काबू पा लिया गया।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में वर्ष 2021 में 282 वनाग्नि की घटनाओं में 516.80 हेक्टेयर प्रभावित हुआ था। पिछले वर्ष आग की 39 घटनाओं से 33.50 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा था। विभाग ने वनाग्नि से निपटने के लिए 68 क्रू स्टेशन बनाए हैं।
बेड़ीनाग रेंज में एक मॉडल क्रू स्टेशन की स्थापना की गई है। गर्मी बढ़ने पर कुछ जगहों पर आग की घटनाएं देखने को मिली जिन्हें विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर उन पर काबू पा लिया।
प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह का कहना है कि मौसम के साथ देने से अभी वनाग्नि की घटनाएं नहीं हुई हैं। उन्होंने लोगों से आग लगने पर विभागीय टीम को सूचना देने का अनुरोध किया है।
अपील : सावधानी ही बचाव है
- जंगलों में जलती माचिस की तीली या बीड़ी न फेंकें।
- आग की सूचना तत्काल विभागीय टीम को दें।
- सूखी घास और चीड़ की पत्तियों (पिरुल) के पास आग जलाने से बचें।