गोरीपार के 13 गांवों को जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग ने आखिरकार बसंतकोट के पास गोरी में लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर दिया है। पुल से आवागमन शुरू हो गया है। इस स्थान पर पहले झूलापुल था जो जून 2013 में आई आपदा के समय बह गया। बाद में लोनिवि ने लोगों के आवागमन के लिए इस स्थान पर गरारी लगाई थी। गरारी से गिरकर इस अवधि में दो लोगों की मौत हो गई थी और कई लोगों का सामान भी नदी में बह गया था। बसंतकोट के पास गोरी में पुल बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र की जनता ने कई बार उग्र आंदोलन किए। प्रशासन ने आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए थे। इस बीच भारी जन दबाव को देखते हुए लोनिवि ने तीन लाख रुपये की लागत से अस्थायी पुल का निर्माण कर दिया है। पुल बनने से गरारी से आवागमन के समय होने वाले खतरे समाप्त हो गए हैं।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी ने बताया कि पुल को काफी मजबूत बनाया गया है। नदी का स्तर बढ़ने पर भी इसको कोई खतरा नहीं होगा। अब गरारी के उपयोग की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। गोरीपार के 13 गांवों के 5000 लोग पुल से आसानी से आवागमन कर सकते हैं। गोरीपार के लोगों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले भाजपा विधानसभा क्षेत्र प्रभारी जगत मर्तोलिया ने कहा है कि सरकार चाहे कितना ही दमन कर दे लेकिन जनता के मुद्दों को हमेशा उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि उग्र आंदोलन नहीं किया जाता तो सरकार बसंतकोट में पुल का निर्माण नहीं करती। अब लोगों को राहत मिली है और आंदोलन सफल हुआ है।