खलियाटॉप में कई हिमालयी पक्षियों की मौजूदगी है। 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलियाटॉप में स्नो कॉक के अलावा एक नया हिमालयी पक्षी भी नजर आया है। इसे बर्ड वॉचरों ने स्नो पाट्रिज दिया है। आमतौर पर झुंड में रहने वाला औसत कद का यह पक्षी खतरा होने पर ही भागने की कोशिश करता है। स्नो पाट्रिज की जितनी भी गतिविधियां नजर आईं, उसके अनुसार यह झुंड में ही दिखता है। बहुत कम ऊंचाई तक उड़ान भरने वाले इस पक्षी के लिए भी खतरे बहुत है।
खलियाटॉप में बर्ड वाचिंग कर रहे राजेश पंवार ने बताया कि स्नो पाट्रिज बेहद खूबसूरत, स्वभाव से शर्मीला पक्षी है। यह 3500 मीटर से नीचे नजर नहीं आता। जब उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फ कम होती है तो यह पंचाचूली के बेस तक पहुंच जाता है। उन्होंने बताया कि खलियाटॉप में पहली बार बर्ड वाचिंग हुई है और पहली बार में ही बेहतर परिणाम सामने आए हैं। पिछले पांच दिनों से चल रही बर्ड वाचिंग के दौरान मोनाल, स्नो कॉक जैसे पक्षियों के अलावा स्नो पाट्रिज भी नजर आया है।
बर्ड वाचिंग टूर को आर्गेनाइज करने वाले सुरेंद्र पंवार ने बताया कि सोशल मीडिया में अब खलियाटॉप में पक्षियों की मौजूदगी के प्रमाण मिल गए हैं। आने वाले समय में इस क्षेत्र में ज्यादा संख्या में वाचरों के पहुंचने की उम्मीद है। पुणे, दिल्ली के कई वाचरों ने इस बारे में संपर्क साधा है।
मध्य हिमालय में मिलते हैं छोटे पक्षी
मध्य हिमालय में सिंटोला (मैना), कबूतर, घुघुती जैसे पक्षियों की बड़ी संख्या नजर आ जाती है। एक बार गौरेया गायब होने लगी थी, फिर से उनकी मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों को राहत दी है। कौए, चील भी काफी संख्या में दिख जाते हैं। बर्ड वाचरों ने मध्य हिमालय के बजाए उच्च हिमालयी क्षेत्र का ही चयन किया है।
जैव विविधता के लिए अच्छा संकेत
युवा प्रकृतिप्रेमी सुरेंद्र पंवार का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के नजर आना जैव विविधता संरक्षण के लिहाज के काफी अच्छा है। इन पक्षियों को अपने रहने लायक माहौल मिल जाता है और उनको भोजन के लिए पर्याप्त साधन भी उपलब्ध हो जाते हैं। इसे अच्छा संकेत माना जा सकता है।