पिथौरागढ़। सीमांत जिले में लावारिस कुत्ते लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। नगर में इनकी आबादी रोकने के लिए बधियाकरण अभियान चला तो अब इन्होंने गांवों और कस्बों में डेरा जमा लिया है। लावारिस कुत्तों के नगर छोड़ने से नगर निगम में तो राहत है लेकिन निगम के बाहरी क्षेत्रों के लोग दहशत में आ गए हैं। आशंका है कि यदि अभियान रुका तो फिर से ये श्वान नगर में पहुंचेंगे। इस दिक्कत से छुटकारा पाने के लिए अब नगर निगम जिला पंचायत का सहयोग लेने पर विचार कर रहा है।
दरअसल, नगर क्षेत्र में लावारिस श्वानों की बढ़ती आबादी और इनकी दहशत को रोकने के लिए इनके बधियाकरण का अभियान चलाया जा रहा है। एजेंसी के माध्यम से इन्हें पकड़कर बधियाकरण किया जा रहा है। शायद ये लावारिस श्वान नगर निगम की इस चाल से दो कदम आगे चल रहे हैं क्योंकि नगर निगम की टीम से बचने के लिए लावारिस कुत्ते नगर छोड़कर इससे लगे गांवों और कस्बों में पहुंच गए हैं।
पंडा, जाजरदेवल, सल्मोड़ा, भड़कटिया, वड्डा सहित अन्य क्षेत्रों में पहुंचे लावारिस श्वानों से लोग दहशत में हैं। आए दिन घरों, गलियों और सड़कों में ये लावारिस श्वान महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं। इनकी इस चाल से नगर निगम को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा है। आशंका है कि यदि नगर में बधियाकरण अभियान रुक गया तो फिर से ये यहां पहुंचेंगे जिससे इनकी आबादी को रोकना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में अब नगर निगम ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला पंचायत का सहयोग लेने की योजना तैयार की है।
जिला पंचायत गांवों और कस्बों में पहुंचे लावारिस श्वानों का कराएगा बधियाकरण
चालाक श्वानों के आगे नगर निगम को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। नगर निगम के मुताबिक, अब जिला पंचायत गांवों और कस्बों में पहुंचे लावारिस श्वानों का बधियाकरण कराएगा। नगर निगम अपनी टीम और वाहन जिला पंचायत को उपलब्ध कराएगा। पकड़े गए लावारिस श्वान के बधियाकरण में आने वाला खर्च जिला पंचायत को वहन करना पड़ेगा। नगर निगम ने इस संबंध में जिला पंचायत को पत्र भेजा है।
दो साल में खर्च हुए 72 लाख, नतीजा शून्य
नगर निगम ने बीते दो साल में पांच हजार से ज्यादा लावारिस श्वानों के बधियाकरण में 72.50 लाख रुपये खर्च कर दिए लेकिन नतीजा शून्य रहा है। अब भी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में लावारिस श्वानों की आबादी रुकने के बजाय बढ़ रही है। बधियाकरण के बाद नगर क्षेत्र की गलियों और सड़कों पर नजर आने वाले श्वानों के बच्चे नगर निगम के इस अभियान की हकीकत बयां कर रहे हैं। कुत्तों के काटने से हर रोज 10 से अधिक लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
कोट
लावारिस श्वानों की आबादी रोकने के लिए इनके बधियाकरण का अभियान जारी है। कई श्वान इससे बचने के लिए आसपास के गांवों और कस्बों में पहुंच रहे हैं जिससे इनकी आबादी पर जल्द लगाम लगाना चुनौती बना हुआ है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला पंचायत की मदद लेने की योजना तैयार की गई है। इस संबंध में पत्राचार किया गया है। - राजदेव जायसी, सहायक नगर आयुक्त, नगर निगम, पिथौरागढ़