पेयजल निगम को राजकीय विभाग घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलित अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सोमवार को यहां जल निगम के मंडलीय कार्यालय में ताले डाल दिए। बाद में जोरदार प्रदर्शन किया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि जल निगम को राजकीय विभाग घोषित करने के मामले में सरकार कोई रुचि नहीं ले रही है। सरकार पर नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि यदि जल्दी फैसला नहीं लिया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष एलएम कर्नाटक की अध्यक्षता और सचिव उमेद सिंह बिष्ट के संचालन में हुई सभा में कहा गया कि सरकार ने जल निगम के राजकीयकरण का फैसला लेने में जानबूझकर देरी की है। इसी कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। वक्ताओं ने कहा कि राजकीयकरण न होने से कर्मचारियों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अब इस मुद्दे पर प्रदेश कार्यकारिणी जो भी फैसला लेगी उसका पूरा पालन किया जाएगा। सभा को आरएस धर्मशक्तू, आशुतोष उपाध्याय, राजीव सैनी, एमसी पाठक, अविनाश चंद, भैरव गिरी, एमएम जोशी, बीएल वर्मा, जीएस चौहान, माधो सिंह, आनंद सिंह, मदन सिंह, प्रकाश सिंह, कलावती आदि ने संबोधित किया।