सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर बंदीगृहों और बंदियों की समस्या जानने के लिए गठित पुनर्विलोकन समिति को बंदीगृह के निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिली। टीम की जानकारी में आया कि धारा 363, 376, पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार प्रेम राम को अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन उसका जमानतनामा प्रस्तुत न हो पाने के कारण वह रिहा नहीं हो पाया है। अब समिति ने उसे लीगल एड काउंसिल उपलब्ध कराने का फैसला लिया है।
पुनर्विलोकन समिति में शामिल जिला जज सिकंद कुमार त्यागी, जिलाधिकारी एचसी सेमवाल, पुलिस अधीक्षक रोशन लाल शर्मा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा तिवारी, सिविल जज सीनियर डिवीजन रीतेश कुमार श्रीवास्तव को बंदीगृह में कई अव्यवस्थाएं मिली। कैदियों को पेयजल उपलब्ध न होने, बंदीगृह की दीवारें गंदी होने, कैदियों को तेल, साबुन न मिलने, बंदीगृह में स्वच्छक की व्यवस्था न होने, बिजली की व्यवस्था न होने और कैदियों को कम खाना मिलने जैसी खामियां मिली। समिति के सदस्यों ने तहसीलदार और बंदीगृह के प्रभारी को सख्त निर्देश दिए कि यह अव्यवस्थाएं तत्काल दूर की जाएं। कैदियों ने इन समस्याओं का खुलासा टीम के सदस्यों के सामने किया।