पिथौरागढ़। चंडिका घाट मंदिर में रामगंगा नदी पर स्वीकृत मोटर पुल 18 साल बाद भी नहीं बन सका है। पुल बनने से जनपद के चार विकासखंडों की दूरी कम होने के साथ ही चंडिका मंदिर और प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती।
धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण चंडिका घाट मंदिर के समीप रामगंगा नदी पर वर्ष 2006 में 80 मीटर लंबा पुल बनाने का शासनादेश जारी हुआ था। पुल बनने से गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, कनालीछीना, विण विकासखंडों की दूरी कम हो जाती।
गंगोलीहाट के भेरंग पट्टी और कनालीछीना ब्लॉक के बाराबीसी पट्टी के 22 गांवों के लोगों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद थी। श्रद्धालु वर्ष भर चंडिका मंदिर में पूजा के लिए जाते रहते हैं। पुल नहीं होने के कारण उन्हें कई किलोमीटर घूमकर आवाजाही करनी पड़ती है।
पुल बनने के बाद चारों विकासखंड के लोग एक ही दिन में चंडिका मंदिर, महाकाली मंदिर, पाताल भुवनेश्वर सहित अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर आवाजाही कर सकते हैं। पिथौरागढ़ और कनालीछीना की ओर से सड़क नदी के पास तक पहुंच चुकी है, लेकिन पुल निर्माण नहीं होने से इस सड़क का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
रामगंगा घाटी में पुल निर्माण के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे पिथौरागढ़ के पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष जगत सिंह खाती ने मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन देकर उन्हें समस्या से अवगत कराया। उन्होंने कहा है कि सड़क धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। स्वीकृत पुल का निर्माण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि यदि शीघ्र निविदाएं आमंत्रित कर पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे।