विण विकासखंड की बाल विज्ञान कांग्रेस में बच्चों ने मौसम और जलवायु की समझ पर कई प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। बाल वैज्ञानिक बदलते मौसम से कृषि और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर से खासा चिंतित दिखाई दिए। बच्चों ने अपने आसपास के गांवों में जाकर बदलते मौसम के कारण खेती पर पड़ रहे प्रभाव की जानकारी जुटाई है। इस बार बाल विज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय मौसम और जलवायु ही तय किया गया है।
बच्चों को मुख्य विषय के साथ छह उपविषयों में भी अपने प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कहा गया। बच्चे मौसम की स्थितियों का आकलन बारीकी से करने में सक्षम हैं। बच्चों ने 2013 की आपदा को भी देखा है। उसके बाद समय पर बारिश न होने, समय पर हिमपात न होने, शहरों में नमी का स्तर लगातार कम होने, बेमौसम बारिश होने जैसी घटनाएं सामने आती जा रही हैं। सूखे से खेती पर पड़ने वाले असर, ज्यादा बारिश से फसलों को होने वाले नुकसान पर भी बाल वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। बाल वैज्ञानिक सुझाव देते हैं कि मौसम में बदलाव को देखते हुए फसल चक्र में भी परिवर्तन लाया जाना चाहिए। बाल विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन एलडब्लूएस कन्या इंटर कालेज की प्रभारी प्रधानाचार्य निर्मला भट्ट ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों ने मौसम और जलवायु पर अपनी जिज्ञासा को बेहतर ढंग से सामने लाने का प्रयास किया है। बाल विज्ञान कांग्रेस को इस मायने में सफल कहा जाएगा। ब्लाक विज्ञान समन्वयक मोहन चंद्र पाठक ने बाल विज्ञान कांग्रेस में 265 बाल वैज्ञानिक कुल 53 प्रोजेक्ट के साथ शामिल हो रहे हैं। प्रोजेक्ट के मूल्यांकन के लिए भानदेव भट्ट, गीता तिवारी, संजय पांडे, अंजना चंद, अखिलेश सौन, सीमा, मीरा द्विवेदी, योगेश ओझा, अजय सिंह बिष्ट, बरखा बिष्ट, कमल किशोर पाठक, प्रियंका बिष्ट, विमल जोशी, हिमांगिनी सारा सिंह, सुमिता, ग्लेडिस चंद नियुक्त किए गए हैं।