पिथौरागढ़ के घंटाकरण में वट वृक्ष का पूजन करतीं महिलाएं
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वटसावित्री अमावस्या पर बृहस्पतिवार को महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखा। वट के पेड़ की पूजा की। पहाड़ पर वटसावित्री का बड़ा महत्व है। सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती हैं। कहा जाता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान की जिंदगी बचाने के लिए वट के पेड़ के सामने तपस्या की थी। उनकी तपस्या से खुश होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए थे। अतीतकाल से चली आ रही इस मान्यता का आज भी पूरी श्रद्धा के साथ पालन हो रहा है।
घंटाकरण के शिव मंदिर के पास स्थित वटवृक्ष की बृहस्पतिवार को हजारों महिलाओं ने पूजा की। पंडित आनंद बल्लभ जोशी ने पूजा-अर्चना कराई। सबसे पहले महिलाओं ने गणेश पूजन किया। उसके बाद वट सावित्री का पूजन किया गया। महिलाएं इस व्रत के दिन पूरा शृृंगार करती हैं। पितरौटा के शिव मंदिर, घुपौड़ के शिव मंदिर में भी सैकड़ों महिलाएं वट पूजन के लिए जुटी रहीं। थल में महिलाओं ने वट पूजन के साथ-साथ शिवालय में भी पूजा-अर्चना की। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं ने घरों में बैठकर पूजा की। अस्कोट, डीडीहाट, मुनस्यारी, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग में भी वट सावित्री का पर्व धूमधाम से मनाया गया।