हिलजात्रा (मुखौटा) नृत्य का दीदार विजयपथ पर 26 जनवरी की परेड में होगा। 2023 में पिथौरागढ़ के छलिया नर्तकों के दल ने भी गणतंत्र दिवस परेड में प्रस्तुति दी थी। हिलजात्रा की तैयारी के लिए आठ सदस्यीय टीम दिल्ली पहुंच गई है।
कुमाऊं का सबसे अधिक रोमांचित करने वाले पर्व हिलजात्रा (मुखौटा) नृत्य का दीदार विजयपथ पर 26 जनवरी की परेड में होगा। यह लगातार दूसरा मौका है जब गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के दर्शन होंगे। 2023 में पिथौरागढ़ के छलिया नर्तकों के दल ने भी गणतंत्र दिवस परेड में प्रस्तुति दी थी। हिलजात्रा की तैयारी के लिए आठ सदस्यीय टीम दिल्ली पहुंच गई है।
विज्ञापन
परेड के लिए देश भर से 1300 महिला कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। इनमें पिथौरागढ़ की भाव राग ताल नाट्य अकादमी की आठ महिला कलाकार शामिल हैं। निदेशक कैलाश कुमार के नेतृत्व में सिमरन दिगारी, प्रीति रावत, तनुजा गोस्वामी, आरती गड़िया, सपना, प्रिया, शीतल और कुमकुम आर्या दिल्ली गई हैं।
हिलजात्रा के बारे में जानिए
हिलजात्रा लोक पर्व आज भी आस्था, विश्वास और रोमांच के प्रतीक है। सोरघाटी का ऐतिहासिक हिलजात्रा पर्व 500 वर्षों से मनाया जा रहा है। सातू-आंठू से विभिन्न गांवों में शुरू होने वाले इस कृषि पर्व का समापन पिथौरागढ़ में हिलजात्रा के रूप में होता है। इस अनोखे पर्व में बैल, हिरण, लखिया भूत जैसे कई पात्र मुखौटों के साथ मैदान में उतरकर नृत्य से देखने वालों को रोमांचित कर देते हैं। हिलजात्रा का इतिहास नेपाल के साथ भी जुड़ा है।
हिरन-चीतल की देंगे प्रस्तुति
भाव राग ताल नाट्य अकादमी की महिला कलाकार हिरन-चीतल, बैलों की जोड़ी, मां महकाली, एकलवा बैल और लाटा-लाटी का किरदार निभाते हुए प्रस्तुति देंगी। केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली और उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के विशेष सहयोग से महिला टीम हिलजात्रा की प्रस्तुति देगी। इसके लिए टीम के सभी कलाकारों में उत्साह है। - कैलाश कुमार, निदेशक भाव राग ताल नाट्य अकादमी िपथौरागढ़।