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जड़ों से जुड़े रहने के लिए मातृभाषा का प्रयोग जरूरी

Thu, 08 Mar 2018 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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काव्यगोष्ठी में आदलि कुशलि पत्रिका के अंक का विमोचन करते लोग - फोटो : अमर उजाला
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आदलि कुशलि मासिक पत्रिका की काव्य गोष्ठी में कवियों, साहित्य प्रेमियों ने अपनी भाषा के संरक्षण पर बल दिया। कहा गया कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए मातृभाषा का प्रयोग जरूरी है।

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गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए आदलि कुशलि की संपादक डॉ. सरस्वती कोहली ने कहा कि अपनी भाषा को बचाना, लोक साहित्य, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में पत्रिका काम कर रही है। मुख्य अतिथि लालकुआं से आए मोहन जोशी ‘मोहन दा’ ने कहा कि आदलि कुशलि पत्रिका की मदद से पिथौरागढ़ में साहित्यिक माहौल को और पुख्ता करने में मदद मिलेगी। प्रोफेसर पीएन चौबे ने पत्रिका की गुणवत्ता और इसके प्रचार-प्रसार को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। बागेश्वर से आए सुशील कुमार ने कुमाऊंनी भाषा को लिपिबद्ध रूप में लोगों के सामने रखने पर जोर दिया।

वरिष्ठ कवियत्री आशा सौन ने कहा अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए मातृभाषा का प्रयोग होना आवश्यक है। मुकेश कोहली हौशिया ने पत्रिका के मूल विषय और उस पर आ रही कठिनाई को सामने रखा। गोष्ठी के बाद काव्यपाठ किया गया। आशा सौन ने बलि प्रथा पर चोट करते हुए कहा-मन में पाप लीभेर ऊंछा भगवानाक दरबार, जीव हत्या करिभेर कूंछा सुरती राखो मेरो घरबार, डॉ. सरस्वती कोहली ने कहा-रोशन पुर नै हुन दिमरया चेलिस, फिरि ले पुरि नै बुझि रै चेलि। बाल कवि लक्षिका ने कहा-अप्पू, डब्बू, पप्पू आ मिलि जुलिभेर पेड़ लगा। प्रकाश जोशी शूल के संचालन में हुई गोष्ठी में मंजू देवी, भावना कोहली, अनमोल प्रसाद आदि मौजूद थे।

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