तहसील खुलने के दो साल बाद भी गणाईगंगोली में तहसीलदार की तैनाती सरकार नहीं कर पाई है। इस समय तहसीलदार का प्रभार कानूनगो (राजस्व निरीक्षक) के पास है। प्रमाण पत्रों के लिए गंगोलीहाट तहसील पर निर्भरता बनी हुई है। स्थायी कर्मचारियों का भी तहसील में नितांत अभाव है।
गणाईगंगोली के लोगों की 80 के दशक की तहसील बनाने की मांग वर्ष 2013 में पूरी हुई, जब सरकार ने तहसील का शासनादेश जारी किया। नवंबर 2014 से गणाईगंगोली में तहसील संचालित हुई, लेकिन अब तक स्थायी तहसीलदार की तैनाती नहीं हो पाई है। कुछ समय तक तहसील का प्रभार नायब तहसीलदार के पास रहा। सितंबर 2016 में नायब तहसीलदार के सेवानिवृत्त होने के बाद से राजस्व निरीक्षक जय सिंह पाल के पास नायब तहसीलदार और तहसीलदार का चार्ज है। तहसील में केवल एक लिपिक स्थायी है। चार लिपिक संविदा में तैनात हैं।
प्रमाण पत्र ऑनलाइन गंगोलीहाट तहसील भेजे जाते हैं। गंगोलीहाट से तहसीलदार और एसडीएम के हस्ताक्षर होने के बाद गणाईगंगोली तहसील से प्रमाण पत्र जारी होते हैं। तहसील का अपना भवन भी अभी नहीं बन पाया है। तहसील कानूनगो चौकी से संचालित होती है। कुल मिलाकर तहसील का पूरा लाभ इलाके के लोगों को अभी नहीं मिल पा रहा है।
पटवारियों के आधे पद रिक्त
गणाईगंगोली तहसील में पटवारियों के 6 पद सृजित हैं, इनमें से तीन पद खाली हैं। ग्वाड़ी, चाक, गणाई पट्टी में ही पटवारियों की तैनाती है। ननोली, देवराड़ी पंत, सिमल्ता पट्टी में पटवारी नहीं हैं।
कम से कम तहसीलदार की तो नियुक्ति हो
कुनल्ता निवासी रमेश चंद्र नेवलिया कहते हैं कि तहसील का पूरा लाभ लोगों को तभी मिल पाएगा, जब तहसील में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हों। कहते हैं कम से कम तहसीलदार तो तहसील में नियुक्त होना ही चाहिए।
दूसरी तहसील पर निर्भरता ठीक नहीं
छचार गांव निवासी नवल किशोर पांडेय कहते हैं कि तहसील बनने के बाद भी दूसरी तहसील पर निर्भरता ठीक नहीं है। सरकार को तहसील की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की ओर ध्यान देना चाहिए। तभी लोगों को राहत मिलेगी।