इस हालत में पहुंच गई थल-सातशिलिंग रोड
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20 जून 2015 को जब उत्तराखंड स्टेट रोड इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट के तहत थल-सातशिलिंग रोड के सुधारीकरण का काम शुरू हुआ तो उस समय लोगों को लगा कि वर्षों से खराब पड़ी इस सड़क की दशा सुधर जाएगी और जिले की इस महत्वपूर्ण सड़क के भी दिन फिर जाएंगे। एडीबी ने सड़क सुधारीकरण के लिए 44.04 करोड़ रुपए की राशि दी और सुधारीकरण का काम दिल्ली की प्रोजेक्ट इंफ्रास्टक्चर लिमिटेड (पीआरएल) को सौंपा गया। करीब डेढ़ वर्ष से इस सड़क के सुधारीकरण का काम चल रहा है, लेकिन अब इस सड़क पर कई जगह नए डेंजर जोन तैयार हो गए हैं।
लोग इस बात को लेकर आश्चर्य में हैं कि सरकारी धन का इतना खुला दुरुपयोग होने के बाद भी जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने क्यों मौन साध रखा है। थल से दो किलोमीटर आगे तड़ीगांव के पास जिस कॉजवे को बनाने की तैयारी की गई थी उसे आधे में छोड़ दिया गया है। इस स्थान पर कई वाहन फिसल गए हैं और अक्सर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सड़क की दुर्दशा को लेकर शनिवार को जब एडीबी कंस्ट्रक्शन डिवीजन के अधीक्षण अभियंता करन सिंह को फोन किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अधिशासी अभियंता डीपी आर्या का फोन बंद मिला। बताया गया कि सड़क सुधारीकरण के समय किसी भी अधिकारी ने मौके पर जाने की जरूरत नहीं समझी और निर्माण कंपनी ने अपनी मनमर्जी से ही सारे काम किए।
दुर्दशा की सीबीआई जांच की जाए
सामाजिक कार्यकर्ता पूरन सिंह भैंसोड़ा का कहना है कि सड़क की दुर्दशा की सीबीआई जांच होनी चाहिए। तभी खामियों का पता चलेगा। वह कहते हैं कि एक तरफ देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चल रहा है, दूसरी तरफ निचले स्तर पर अधिकारी सरकारी कामों को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जनता के धन की बर्बादी न की जाए
थल निवासी महिपाल सिंह का कहना है कि यह सरासर जनता के धन की बर्बादी है। इसके लिए किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने अपेक्षा की कि ईमानदार छवि वाले डीएम जरूर इस मामले में कोई कदम उठाएंगे और कम से कम सड़क की दशा ठीक हो जाए, लोग यही चाहते हैं।