पिथौरागढ़। सीमांत के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज के सपने दिखाकर 68 करोड़ रुपये से खोले गए मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में बमुश्किल दो विशेषज्ञों की तैनाती हुई है। बगैर संसाधनों के इन विशेषज्ञों के लिए मरीजों का इलाज करना मुश्किल है। बेस में न तो ओटी अस्तित्व में आ रही है और ना ही इसके लिए मशीनरी की व्यवस्था हुई है। ऐसे में दोनों विशेषज्ञों को जिला अस्पताल में अटैच करना पड़ा है और बेस अस्पताल में सुनसानी छाई है।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में विशेषज्ञों के 159 पद स्वीकृत हैं। संचालन के तीन साल बाद बमुश्किल यहां दंत और हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में दो असिस्टेंट प्रोफेसर की तैनाती हुई है। बेस अस्पताल में अब तक ओटी अस्तित्व में नहीं आ सकी है। इलाज के लिए जरूरी संसाधनों की भी भारी कमी है। यही कारण है कि मरीज यहां इलाज के लिए जाने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। सीमित ओपीडी होने और इलाज के लिए बेहतर संसाधन न होने से दोनों विशेषज्ञों को जिला अस्पताल में अटैच करना पड़ा है। ऐसे में करोड़ों से खोला गया बेस अस्पताल सीमांत के लोगों के लिए सफेद हाथी बना है।
जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़, बेस में सुनसानी
करोड़ों रुपये से बेस अस्पताल खोलने के बाद भी जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव कम नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल में हर रोज औसतन 680 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं जबकि बेस में सुनसानी छाई है। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल में 120 बेड के सापेक्ष 130 से अधिक मरीजों को बरामदे में बिस्तर लगाकर भर्ती करना पड़ रहा है। यदि बेस अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ और संसाधन होते तो साफ है कि जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव कम होता। मरीजों को बरामदे में रहकर इलाज नहीं कराना पड़ता।
कोट
मेडिकल कॉलेज और इसके अधीन संचालित बेस अस्पताल में जरूरी संसाधन जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की तैनाती के भी लगातार प्रयास हो रहे हैं। जल्द ही बेस अस्पताल में मरीजों को इलाज की हर सुविधा मिलेगी। - डॉ.एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़