दारमा घाटी के अंतिम गांव सीपू में ग्रामीणों के साथ प्रशिक्षणरत अधिकारी। स्रोत: ग्रामीण
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लाल बहादुर शास्त्री अकादमी मसूरी के 20 प्रशिक्षणरत आईएएस, आईपीएस, आईआरएस, आईएफएस अधिकारियों ने दारमा घाटी के वाइब्रेंट घोषित गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के रहन-सहन, संस्कृति और समस्याओं के बारे में जानकारी ली। आईएएस तुषार नेगी के नेतृत्व में अधिकारियों ने ग्राम पंचायत दर, सोन दुग्तु, तिंदांग, मार्छा और प्रथम गांव सीपू पहुंचकर ग्रामीणों के रहन सहन, संस्कृति, स्वास्थ, सड़क, बिजली, पानी और अन्य समस्याओं की जानकारी ली।
36 वीं वाहिनी आईटीबीपी लोहाघाट के द्वितीय कमान अधिकारी बेगराज मीना, सहायक कमांडेंट नारायण सिंह गर्खाल और सीएमओ डॉ. हर्षवर्धन और जवानों की निगरानी में प्रशिक्षणरत अधिकारी 10 किमी की पैदल यात्रा कर दारमा घाटी के 11820 फुट की ऊंचाई पर बसे अंतिम गांव सीपू पहुंचे। यहां पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े और पारंपरिक वेशभूषा के साथ उनका स्वागत किया। साथ ही उन्हें ब्रह्म कमल पुष्प भेंट किया। अधिकारियों ने गांव पहुंचने पर ग्रामीणों के साथ महादेव के मंदिर में पूजा-अर्चना की।
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सीपू निवासी आईटीबीपी के पूर्व निरीक्षक ज्ञान सिंह और ग्रामीणों ने अधिकारियों को गांव की मूलभूत समस्याओं के बारे में बताया। ग्रामीणों ने गांव की स्मारिका पुस्तक भी भेंट की। इस दौरान उपर सिंह, ज्ञान सिंह, जीवन सीपाल, सुंदर सीपाल, जय सिंह, बहादुर सिंह, दलीप सिंह, धर्म सिंह आदि मौजूद रहे। सीपू गांव के बाद अधिकारी ग्राम सौन दुग्तू और दर पहुंचे। वहां सामाजिक कार्यकर्ता राम सिंह सोनाल, लक्ष्मण सिंह दरियाल ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए गांव की मूलभूत समस्याओं के बारे में बताया।