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लखियाभूत के मैदान में आते ही रोमांच

Fri, 01 Sep 2017 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ के कुमौड़ मैदान में ढोल नगाड़ों के साथ लाया जा रहा लखियाभूत - फोटो : ‌विपिन गुप्‍ता
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आस्था और रोमांच के बीच सोरघाटी (पिथौरागढ़) के कुमौड़ गांव का प्रसिद्ध हिलजात्रा उत्सव शुक्रवार को संपन्न हो गया। रस्सियों से जकडे़ लखियाभूत के हिलजात्रा मैदान में पहुंचते ही वहां रौंगटे खड़े करने वाला दृश्य पैदा हो गया। करीब 25 हजार लोग इस अद्भुत लोक परंपरा के साक्षी बने। सदियों से चली आ रही इस लोक परंपरा के प्रति लोगों की आस्था कम नहीं हुई है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत इस आयोजन में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। पंत ने कहा कि इस लोक परंपरा को जीवित रखने के लिए लोगों को सजग रहना होगा। सरकार ऐसे आयोजनों के संरक्षण के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने हिलजात्रा मेला स्थल के विकास के लिए दो लाख रुपये देने की घोषणा की। 
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हिलजात्रा पर्व की तैयारी कुमौड़ गांव में एक सप्ताह पहले से शुरू हो गई थी। शुक्रवार दोपहर बाद पिथौरागढ़ नगर के लोगों का रुख कुमौड़ गांव की ओर था। देखते ही देखते कुमौड़ का ऐतिहासिक मैदान लोगों की भीड़ से खचाखच भर गया। लोग घरों की छतों पर जमा हो गए। शाम करीब 6.15 बजे से उत्सव की शुरुआत हुई। कुमौड़ के ऐतिहासिक कोट (किले) से सबसे पहले रोपाई लगाने वाली महिलाओं का दल मैदान में उतरा। उसके बाद गलिया बल्द (आलसी बैल) की जोड़ी लाई गई। काफी देर तक यह कार्यक्रम चला।

शाम 6.30 बजे ढोल-नगाड़ों के बीच जैसे ही लखियाभूत को मैदान में लाया गया तो लोगों के रौंगटे खड़े हो गए। बच्चे इधर-उधर भागने की कोशिश करने लगे। लखियाभूत को नियंत्रित करने के लिए बड़ी-बड़ी रस्सियों का सहारा लिया गया। लखियाभूत की भूमिका इस बार यशवंत महर ने निभाई। उनको नियंत्रित करने के लिए रस्सियों को बलवंत महर और पवन महर ने पकड़ा था। गल्या बल्द (आलसी बैल) की जोड़ी में इस बार समीर दिगारी, अभिषेक महर, सूरज महर और कोनाल महर थे। सभी ने विशेष प्रकार का मुखौटे पहने थे। बताया जाता है कि यह मुखौटा महर राजपूतों के वंशज नेपाल से जीतकर लाए थे। मान्यता है कि लखियाभूत जितना आक्रामक है, प्रसन्न होने पर उतना ही फलदायी भी होता है। हजारों की संख्या में मौजूद महिलाओं और पुरुषों ने लखियाभूत का आशीर्वाद प्राप्त किया। विश्वास है कि इस तरह की उपासना और आयोजन से लखियाभूत प्रसन्न हो जाते हैं। इससे गांव और इलाके में किसी प्रकार की विपदा नहीं आती, फसल बेहतर होती है, सूखे और प्राकृतिक आपदा का प्रकोप नहीं होता है। महिलाओं ने लखियाभूत पर फूल और अक्षत बरसाए।       
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करीब दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक मयूख महर, पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, भाजपा नेता महेंद्र लुंठी, राजेंद्र रावत जिलाधिकारी सी रविशंकर, एसपी अजय जोशी आदि उपस्थित थे। आयोजन समिति के गोपू महर, चंद्रशेखर सिंह महर, शमशेर महर आदि ने व्यवस्था बनाने में सहयोग दिया। संचालन कै. दीवान सिंह वल्दिया, जनार्दन वल्दिया, केडी भट्ट ने किया। 

लखियाभूत के मैदान में आते ही थमी बारिश
शुक्रवार को पूरे दिन यहां रिमझिम बारिश थी। अपरान्ह पांच बजे तक भी बारिश का क्रम जारी रहा। जैसे ही लोग कुमौड़ के हिलजात्रा मैदान लखियाभूत ने कदम रखा तो बारिश थम गई। लोगों ने हिलजात्रा का जमकर आनंद उठाया।

लखियाभूत ने तीन चक्कर लगाए
पिछले साल तक लखियाभूत मैदान का सिर्फ एक चक्कर लगाता था, लेकिन इस बार अस्वस्थता के बावजूद लखियाभूत बने यशवंत महर ने मैदान के तीन चक्कर लगा दिए। यशवंत के कमर में दर्द है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा से ही यह ताकत मिली।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही
हिलजात्रा उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची रही। लोक संस्कृति पर आधारित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए। कलाकारों ने लखियाभूत को प्रसन्न करने वाले गीत गाए।

पर्वतीय कृषि का प्रदर्शन हुआ
हिलजात्रा को कृषि से भी जोड़ा गया है। हिलजात्रा के समय पर्वतीय कृषि की जटिलता, रोपाई लगाना, बैल जोतना समेत कई प्रकार के अभिनय किए जाते हैं। पहाड़ की कृषि में कई तरह की कठिनाइयां आती हैं। इसका मंचन हिलजात्रा के समय हो जाता है।
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